पदमश्री डा. अनिल जोशी की अगुवाई में लैंसडौन पहुंची गांव बचाओ यात्रा।
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पद्मश्री डा. अनिल जोशी के नेतृत्व में चल रही ‘गांव बचाओ यात्रा’ बुुधवार दोपहर को लैंसडौन पहुंची। यात्रा का लोगों ने जोरदार स्वागत किया। कहा कि गांव बचाने को मातृशक्ति व पूर्व सैनिक आगे आएं। ग्रामीणों ने डा. जोशी द्वारा उठाए जा रहे सवालों को आम जनता की आवाज बताते हुए एक और लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।
बुधवार को गांधी चौक पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए डा. जोशी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण में महिलाओं व पूर्व सैनिकों ने महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई। राज्य के लिए कई लोगों ने अपनी शहादतें भी दीं, लेकिन आज वे सभी अवधारणाएं व परिकल्पनाएं मिट्टी में मिल गई हैं। निर्माण के 16 वर्षों के बाद भी राज्य बदहाली की ओर अग्रसर है। गांवों के विकास को घुन लग गया है। इसके लिए सभी सरकारें तथा हर पार्टी के राजनेता जिम्मेदार हैं। डा. जोशी ने कहा कि राजनेताओं की सोच नगरीय हो गई है। गांव में कोई आने को ही तैयार नहीं है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि पहले लड़ाई दूसरों से थी, अब अपनों से ही कर
नी पड़ेगी। तभी उपेक्षित गांवों का विकास संभव है। कहा कि एक बार फिर एक उग्र आंदोलन की आवश्यकता है, जिसमें यदि मातृशक्ति व पूर्व सैनिक पहले की भांति अपनी भागीदारी निभाते हैं तो अवश्य ही हमें जीत मिलेगी। कहा कि राज्य के विकास को पटरी पर लाने व गांवों से पलायन को रोकने के लिए ठोस ढांचे की जरूरत है।
कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष डा. एसपी नैथानी ने कहा कि गांवों के विकास के लिए गांवों का कलस्टर बनाने की जरूरत है। इस मौके पर डा. हिमानी जोशी, विकास पंत, विनोद खाती, मनमोहन नेगी, शालिनी, शुभम भट्ट, सतेंद्र पंवार, अव्वल सिंह, दिनेश, महेंद्र जोशी व मोहन बिष्ट आदि मौजूद रहे। सभा का संचालन महिपाल रावत ने किया।