दर्जनों लोगों पर दिवाली पर लापरवाही भारी पड़ी। कोटद्वार शहर और भाबर से लेकर जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में आतिशबाजी के दौरान कई लोग झुलस गए। इससे उन्हें अस्पतालों में भर्ती करवाना पड़ा। इनमें ज्यादातर को जहां उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, वहीं कई लोग अब भी अस्पताल में उपचार करवा रहे हैं।
घायलों ने बताया कि वे चाइनीज पटाखों से झुलसे हैं।
रविवार रात दिवाली में पटाखे जलाने में लापरवाही बरतने वाले दर्जनों लोगों को प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा। अधिकतर घायलों ने बताया कि वे चाइनीज बम जलाने से झुलसे हैं। बम जलाते ही वे उनके हाथों में फट गए।
पटाखों की चपेट में आकर झुलसने वालों में सबसे अधिक छोटे बच्चे हैं। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के आंकड़ों के अनुसार गाड़ीघाट निवासी सुमित, मानव, दुगड्डा निवासी संजीव कुमार, नजीबाबाद रोड निवासी आलोक असवाल, रमेश नगर निवासी पूजा, ध्रुवपुर निवासी विकास कुमार आदि पटाखों की चपेट में आकर झुलसे हैं। हालांकि सभी को प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सालय से छुट्टी दे दी गई है।
द्वारीखाल के बनाली गांव निवासी दर्शन कंडवाल बताते हैं कि क्षेत्र में कई लोग आतिशबाजी के चलते झुलसे हैं। यमकेश्वर के अशोक नेगी ने कहा कि पटाखों के अंदर ज्यादा बारूद भरा होने के कारण बच्चे ज्यादा झुलसे हैं। उन्होंने अगली दिवाली से केवल दीये जलाकर प्रकाशोत्सव मनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि चीनी पटाखों का बहिष्कार केवल नारों तक सिमट गया था। चीनी निर्मित पटाखों और लड़ियों की खूब बिक्री हुई। आम उपभोक्ताओें को ये पटाखे और लड़ियां भारत में बनी कहकर बेची गईं।