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पेयजल निगम के कार्यालयों में तालाबंदी

Mon, 14 Dec 2015 09:57 PM IST
कोटद्वार
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उत्तराखंड पेयजल निगम, नगर इकाई की ओर से अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति की अपनी मांगों को लेकर तालाबंदी जारी है। उन्होंने सरकार पर पूर्व हुए समझौतों को लागू नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए पेयजल सेक्टर को सरकार के नियंत्रण में लाने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने की चेतावनी दी।  
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सोमवार को पेयजल निगम कार्यालय के समक्ष इंजीनियर शीशराम के नेतृत्व में सभी कर्मचारी कार्यालय प्रांगण में एकत्रित हुए। उन्होंने नारेबाजी के साथ तीनों कार्यालयों में तालाबंदी की और पेयजल निगम यांत्रिक कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि पेयजल निगम पूर्व में सरकारी विभाग था। तत्कालीन यूपी सरकार द्वारा विश्व बैंक से सहायता लेने के लिए बैंक की शर्तों के मुताबिक विभाग को निगम बना दिया। वर्तमान में विश्व बैंक द्वारा सहायता देने में इस प्रकार की कोई शर्त नहीं है। कई राजकीय विभागों में विश्व बैंक के द्वारा पोषित कार्यक्रम के अंतर्गत कार्य कराए जा रहे हैं।

वर्तमान में सेंटेज आधारित व्यवस्था के आधार पर निगम के कर्मियों का वेतन नहीं निकल पा रहा है। इसके कारण कर्मचारी और अधिकारियों का मनोबल गिरता जा रहा है। यही कारण है कि निगम को राजकीय विभाग बनाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। पूर्व में मुख्यमंत्री ने निगम का राजकीय विभाग बनाए जाने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई थी, लेकिन उनके बाद में मुकर जाने के कारण कर्मियों में आक्रोश व्याप्त है।
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इस अवसर पर इंजीनियर आरके चौहान, एमपीएस तोमर, एनके चौहान, सरिता गुप्ता, एसएन त्रिपाठी, शीशराम सिंह, प्रदीप कुमार बौड़ाई, जीसी ध्यानी, सतोष कुमार सिंह, अतुल शर्मा, योगेंद्र नाथ, इंद्रमणी कुकरेती, सूरज मोहन  भट्ट, वीएस रावत, राजेंद्र सिंह, बलवीर सिंह, महिमानंद काला, चंद्रमोहन  जखमोला,  छवि ठाकुर, केसी बलूनी, कल्पना देवी, भारत सिंह रावत, रविंद्र  कुमार, नितिन जखमोला, खड़क सिंह, रमेश चंद्र, वाचस्पति भट्ट, सुनीता देवी,  गीता देवी, हेमलता पांडे, भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
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