दुगड्डा-कांडी-लक्ष्मण झूला स्टेट हाईवे पर अधूरा निर्माण कार्य लोगों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर भारी बरसात के चलते दरकी पहाड़ियां और सड़कों पर जगह-जगह हो रहे भू धंसाव से हादसों की आशंका बनी हुई है। वर्ष 2014 की आपदा में क्षतिग्रस्त इस सड़क के पुनर्निर्माण के लिए सरकार ने 36 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, लेकिन एक साल में सड़क की पूरी तरह से मरम्मत तक नहीं हो सकी है।
दुगड्डा-कांडी-लक्ष्मणझूला स्टेट हाईवे पौड़ी गढ़वाल का प्रमुख हाईवे है, जो धुमाकोट को ऋषिकेश के लक्ष्मणझूला क्षेत्र से जोड़ता है। कई सालों से सड़क की मरम्मत न होने के कारण जहां सड़क ग्रामीण संपर्क मार्ग से भी बदहाल स्थिति में पहुंच गया था, वहीं वर्ष 2014 की आपदा में सड़क का बुरा हाल हो गया है।
आपदा ने जहां नदियों पर बने सभी रपटे बहा दिए, वहीं सैकड़ों जगह पर स्कपर और पुश्ते बह गए। राज्य सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक से प्राप्त 36 करोड़ रुपये इस सड़क के हॉटमिक्स से डामरीकरण करने, पुश्ते, कॉजवे तथा पक्के स्कपर निर्माण के लिए स्वीकृत किए, लेकिन निर्माण कार्य में प्रारंभ से ही गुणवत्ता की अनदेखी की शिकायतें मिलने लगीं। लक्ष्मण झूला से दुगड्डा के बीच हुए निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गए। एसडीएम कोटद्वार की अध्यक्षता में गठित जांच में भी अनियमितताओं की बात उजागर हुई, जिसका निर्माण नए सिरे से करने के निर्देश दिए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि अब कार्यदायी एजेंसी ने दुगड्डा से कांडाखाल तक हॉटमिक्स से डामरीकरण तो किया है, लेकिन बीच में कॉजवे, स्कपर और भू धंसाव क्षेत्र में निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया है। अधूरे स्कपर दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे हैं। तंग मोड़ और डेंजर जोन पर वाहन चालकों की सुविधा के लिए चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं।
पूर्व प्रमुख प्रशांत बडोनी का कहना है कि कार्यदायी एजेंसी ने यदि अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन को मजबूर होंगे। उन्होंने विलंब मांडई गदेरा समेत सभी रपटों का निर्माण करने की मांग की।
बरसात के बाद निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। गुणवत्ता की शिकायतों पर निर्माण एजेंसी कंपनी को हिदायत दी गई है। मांडई गदेरे में पुल का निर्माण करवाया जाएगा।
-मुनेंद्र राजपूत, सहायक अभियंता एडीबी खंड दुगड्डा