शिवपुर में बछिया, ग्रास्टनगंज में कुत्ते का किया शिकार
वन विभाग ने बढ़ाई गश्त, रात में सतर्क रहने की अपील
कोटद्वार। नगर क्षेत्र के वार्ड नंबर-19 शिवपुर, मवाकोट और सनेह क्षेत्र के ग्रास्टनगंज में गुलदार की दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। रविवार रात गुलदार ने शिवपुर में एक बछिया को मार डाला जबकि ग्रास्टनगंज में सड़क पर घूम रहे एक कुत्ते को अपना शिकार बना लिया।
शिवपुर निवासी अशोक सिंह ने बताया कि रविवार शाम उनकी बछिया गोशाला के भीतर बंधी थी। रात करीब आठ बजे अचानक पहुंचे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया और उसे घसीटता हुआ बाहर ले गया। जिससे बछिया की मौके पर ही मौत हो गई। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले भी उनके घर के पास प्रताप कॉलोनी, शिवपुर में गुलदार ने छत से कपड़े उतार रही वृद्धा रामेश्वरी देवी पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। लगातार हो रही घटनाओं से वन सीमा से सटे क्षेत्रों के लोगों में भय का माहौल है और लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
उधर, सनेह क्षेत्र के गिंवाई स्रोत, ग्रास्टनगंज और कुंभीचौड़ क्षेत्र में भी गुलदार की सक्रियता बनी हुई है। रविवार रात ग्रास्टनगंज में एक गुलदार सड़क पर घूम रहे कुत्ते को उठाकर जंगल की ओर ले गया। भाबर के मवाकोट में भी गुलदार की दहशत बनी हुई है।
कोटद्वार रेंज के रेंजर विपिन चंद्र जोशी ने बताया कि शिवपुर में बछिया और ग्रास्टनगंज में कुत्ते के शिकार की सूचना प्राप्त हुई है। घटनाओं के बाद वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है। उन्होंने लोगों से विशेषकर रात्रि के समय अकेले आवाजाही न करने और सतर्कता बरतने की अपील की है।
गुलदार पकड़े जाने के बाद लौट गए दोनों शूटर, पहरे में स्कूल पहुंचे बच्चे
कोटद्वार। नैनीडांडा ब्लॉक के सल्ड महादेव के पास के गांव बणासी में एक गुलदार के पिंजरे में कैद होने के बाद भी ग्रामीणों में दहशत बरकरार है। सोमवार को स्कूल खुलने पर अभिभावक बच्चों को खुद छोड़ने और लेने पहुंचे। वहीं, मृतका सुशीला देवी के बड़े बेटे दिनेश ने सोमवार तड़के गांव के नीचे एक अन्य गुलदार दिखाई देने और गुर्राने की आवाज सुनने की बात वन कर्मियों को बताई। गांव में वन कर्मियों की गश्त जारी है। गांव में तैनात वन विभाग के शूटर लौट गए हैं। वन विभाग ने पिंजरे में कैद गुलदार के डीएनए सैंपल जांच के लिए डब्लूआईआई देहरादून की प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
ग्राम प्रधान सुभाष चंद्र और समाजसेवी अरविंद सिंह नेगी ने बताया कि रविवार शाम करीब साढ़े सात बजे ग्रामीणों ने घटनास्थल के आसपास गुलदार के गुर्राने की आवाजें सुनीं। सोमवार सुबह दिनेश सिंह बिष्ट ने गांव के नीचे गुलदार दिखाई देने की सूचना दी। सोमवार को स्कूल खुलने पर बच्चों को अभिभावक स्वयं कलिंगाखाल स्कूल छोड़ने और वापस लेने पहुंचे। उधर, दीवा रेंज के रेंजर सुभाष चंद्र घिल्डियाल ने बताया कि गांव में दोबारा गुलदार दिखाई देने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पिंजरे में कैद गुलदार के डीएनए सैंपल जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की प्रयोगशाला भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में एहतियातन पिंजरे अब भी लगाए गए हैं और वन विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है। संवाद