कोटद्वार/सतपुली/लैंसडौन। तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से बृहस्पतिवार को राहत मिली। कोटद्वार समेत पूरे क्षेत्र में शाम पांच बजे तक धूप खिली रही, लेकिन कोटद्वार भाबर में शाम को पांच बजे से मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। भारी बारिश से एक बार फिर से शहर से लेेकर ग्रामीण क्षेत्र तक के वार्डों में जलभराव हो गए। सतपुली और लैंसडौन क्षेत्र में बारिश से राहत रही, जिससे नदियों का जलस्तर काफी कम हो गया। सतपुली में दिन तक बाढ़ में डूबा बैराज बृहस्पतिवार को नजर आने लगा लेकिन मलबे में बैराज निर्माण करने वाली कंपनी की जेसीबी समेत कई मशीनें फंसी रहीं।
सतपुली में बृहस्पतिवार को दिनभर चटख धूप रही। यहां दोनों नयार नदियों और मधु गंगा नदी का जलस्तर भी काफी कम हो गया। सतपुली में निर्माणाधीन बैराज की डूबी पोकलेन पानी कम होने से दिखाई देने लगी। वही, बैराज साइट पर मशीनों के पास की अन्य निर्माण सामग्री व शेड बह गया है। इधर, कोटद्वार भाबर क्षेत्र में बृहस्पतिवार शाम से शुरू हुई भारी बारिश के कारण नदी नाले फिर से उफनाने लगे। तेलीसोत गदेरे के उफनाने के कारण लोगों को 8 किमी की अतिरिक्त दूरी तक अपने गांव आवाजाही करनी पड़ी।
फतेहपुर लैंसडौन मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू, एमईएस तिराहे का बैरियर भी हटा
कई दिनों से धंस रहे लैंसडौन मार्ग के जदला बैंड पर सड़क कटान के बाद मार्ग पर बृहस्पतिवार से छोटे बडे़ वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। लोनिवि लैंसडौन की ओर से जदला मोड़ पर धंसी सड़क को जेसीबी से ठीक कराने के बाद छोटे बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी गई है। इससे क्षेत्रवासियों को राहत मिली है। उन्हें गूमखाल के रास्ते लंबी दूरी तय कर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा था। लैंसडौन में बृहस्पतिवार दोपहर से एमईएस तिराहे का बैरियर हटा दिया गया है। जिससे वाहन एमईएस तिराहे से सीधे गांधी चौक पहुंच रहे हैं। अब वाहनों की 700 मीटर दूरी कम हो गई है। दरअसल, बीते जून माह से सड़क निर्माण के कारण सेना के एमईएस विभाग की ओर से जिला सैनिक कल्याण कार्यालय से सब्जी मंडी तक एमईएस तिराहे से वाहनों का रूट डाइवर्ट किया गया था। जिससे वाहनों को 700 मीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर गांधी चौक आना पड़ रहा था।