आईटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) में नियुक्ति के नाम पर युवकों को ठगने का प्रयास किया जा रहा है। युवकों को कॉल लेटर भेजने वाले लोग रुपये जमा करने के बाद प्रशिक्षण देने की बात कर रहे हैं।
बुधवार को श्रीनगर के निकट गहड़ गांव के युवक दीपक सिंह को ऐसा ही एक रजिस्टर्ड पत्र मिला। दीपक गढ़वाल विवि से बीए कर रहा है। उसको आईटीबीपी से कांस्टेबल (टेलीकॉम) पर नियुक्ति और प्रशिक्षण के लिए कॉल लेटर भेजा गया है। पत्र में लिखा गया है कि उसका चयन साक्षात्कार और प्रशिक्षण के लिए हुआ है। तैनाती से पहले उसे तीन माह का प्रशिक्षण लेना होगा। इसके लिए उसे 25 हजार रुपये जमा करने होंगे। प्रशिक्षण के दौरान उसे प्रतिमाह आठ हजार रुपये बतौर स्टाइपंड मिलेेंगे।
यह आकस्मिक भर्ती है। इसलिए अभ्यर्थी को पत्र मिलने के 48 घंटे के अंदर संपर्क करना होगा। फीस जमा करने के बाद उसको एक संदेश और पत्र मिलेगा। उसमें प्रशिक्षण केंद्र के बारे में लिखा होगा। पत्र मेें आईटीबीपी शिलांग का पता दिया गया है। जबकि हस्ताक्षर करते हुए पदनाम डीआईजी (एडमिन) एनई एफटीआर एचक्यूआर लिखा गया है।
25 हजार रुपये जमा करने की बात से दीपक का माथा ठनका। उसको पत्र जाली लगा। पुष्टि के लिए उसने अमर उजाला से संपर्क किया। अमर उजाला संवाददाता ने पत्र में लिखे दोनों मोबाइल फोन नंबर (9555865360, 8882198181) पर कॉल की, तो स्विच ऑफ मिले। लिफाफे में प्रेषक का नाम-पता मुकेश शर्मा, शिवाजी पार्क पंजाबी बाग नई दिल्ली लिखा हुआ है। जबकि डाक विभाग के रजिस्टर्ड स्लिप में पिनकोड 121003 अंकित है। यह कोड अमरनगर फरीदाबाद हरियाणा का है।
ऐसा ही एक पत्र चमोली जिले के जगदीश सिंह पुत्र हीरा लाल निवासी नैल बछुवाबाण गैरसैंण को भी मिला था। उसमें भी 25 हजार जमा करने की बात कही गई थी। वह पत्र डायरेक्टेट एंड मैन पॉवर एंड रिक्वायरमेंट आईटीबीपी मैन पॉवर 134 एफ आईटीबीपी कैंप मेन रोड ऊधमपुर जे एंड के से चीफ डायरेक्टर आईटीबीपी (केटी) रॉबिन डिस्कोजा के नाम से जारी किया गया था।
कोट-
आईटीबीपी से ऐसे कोई पत्र नहीं भेजे जाते हैं। हर पद के लिए विधिवत परीक्षा होती है। कॉल लेटर में व्यक्तिगत मोबाइल फोन नंबर नहीं दिए जाते हैं। यह पत्र जाली है।- ऋषभ कुमार, कमाडेंट आईटीबीपी गौचर