जीएमओयू समेत उत्तराखंड की सभी नौ परिवहन कंपनियों के महासंघ की ओर से 50 फीसदी यात्री क्षमता के साथ यात्री किराया दोगुना करने की मांग को लेकर हड़ताल बुधवार को 11वें दिन भी जारी रही। वहीं रोडवेज की बसों में कटौती किए जाने लोगों को खासी दिक्कत हो रही है।
यूपी सरकार की ओर से उत्तराखंड की बसों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने का सबसे ज्यादा नुकसान कोटद्वार डिपो को उठाना पड़ रहा है। रोडवेज के एजीएम टीकाराम आदित्य ने बताया कि देहरादून से उत्तराखंड की चिड़ियापुर सीमा तक तो सवारी मिल जा रही है, लेकिन कोटद्वार के लिए यात्रियों का टोटा है। रोडवेज की बुधवार को देहरादून के लिए दो बसें और धुमाकोट के लिए एक बस का संचालन किया गया। बाकी रूटों पर यात्री न मिलने के कारण बसें नहीं चलाई गई।
वहीं जीएमओयू का कहना है कि 50 फीसदी सवारियों के प्रतिबंध के साथ किराया दोगुना करने का शासनादेश जारी होने पर ही वाहनों का संचालन संभव है। सरकार के अड़ियल रवैये को देखते हुए 20 मई से बसों के परमिट सरेंडर कराने की तैयारी की जा रही है।