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आदित्य बनकर चमके गढ़वाल के अजय

Sat, 18 Mar 2017 10:18 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, कोटद्वार
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Yogi Adityanath
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर पहुंचने वाले योगी आदित्यनाथ पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर के मूल निवासी हैं। कई साल पहले वह संन्यास धारण कर गोरखपुर में ही रम चुके हैं। आज उनके यूपी के मुख्यमंत्री बनने से कोटद्वार से लेकर यमकेश्वर तक समूचे गढ़वाल में खुशी की लहर है। उनके गांव यमकेश्वर में उनके माता, पिता और छोटे भाई का परिवार रहता हैं। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
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नाते रिश्तेदार, उनके बचपन के दोस्त और क्षेत्रवासी एक दूसरे को मिठाई बांटकर खुशी मना रहे हैं।   पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लाक के पंचूर गांव में पांच जून, वर्ष 1972 को जन्मे अजय मोहन सिंह बिष्ट वर्ष 1993 में संन्यास धारण कर योगी आदित्यनाथ बन चुके हैं। वर्ष 1994 में उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें गुरु गोरखनाथ गोरक्षा पीठ गोरखपुर का उत्तराधिकारी घोषित किया था। वर्ष 1998 में वह मात्र 28 वर्ष की उम्र में पहली बार भाजपा के टिकट पर गोरखपुर से सांसद चुने गए।

तब से वह पांचवीं बार इसी सीट से सांसद चुने गए हैं। अजय मोहन बिष्ट (संन्यास से पूर्व का नाम) यमकेश्वर ब्लाक के उदयपुर वल्ला पट्टी के ग्राम पंचूर निवासी आनंद सिंह बिष्ट व सावित्री देवी के चार पुत्रों में से दूसरे नंबर के बेटे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय ठांगर, जूनियर शिक्षा चमकोटखाल और इंटर तक की शिक्षा भरत मंदिर इंटरकालेज ऋषिकेश में हुई।
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इसके बाद गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी करने के लिए वह कोटद्वार आ गए। इस दौरान वह छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए। उन्होंने राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार के छात्रसंघ चुनाव में महासचिव का चुनाव भी लड़ा। इसके बाद वह एमएससी करने के लिए फिर ऋषिकेश चले गए। वर्ष 1993 में वह गोरखपुर गए और वहां गुरु गोरखनाथ गोरक्षा पीठ के महंत अवैद्यनाथ जी के संपर्क में आए, जिन्होंने इनकी योग्यता को देखकर उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।     

महंत आदित्यनाथ के छोटे भाई महेंद्र बिष्ट ने बताया कि उनका अपने पैतृक गांव से आज भी लगाव है। वे हाल में ही यमकेश्वर विधानसभा चुुनाव में भाजपा प्रत्याशी ऋतु खंडूरी के चुनाव प्रचार में आए थे। तब उन्होंने माता-पिता और परिजनों से भी मुलाकात की थी। आज भी उनका अपने परिवार से संपर्क बना हुआ है। समय-समय पर वे अपने परिवार से मिलने आते रहे हैं।      
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