वाडोऱ्ं में अस्तव्यस्त पड़ी चादरें।
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यहां राजकीय संयुक्त चिकित्सालय की व्यवस्थाओं का दम निकलता जा रहा है। इमरजेंसी वार्ड में गंदगी और खून में लथपथ बेड और चादरें मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती।
स्वास्थ्य कर्मियों में पहले शहर के स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायत जाने का भय रहता था, लेकिन अब मंत्री का पद हटते ही हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जबकि पहले इमरजेंसी वार्ड की पर्याप्त सफाई होती थी, मरीज के अन्य वार्ड में रेफर होते ही, बेड को साफ कर उस पर धुली हुई चादर बिछाई जाती थी। वर्तमान में आलम यह है कि तीन दिन से वार्ड की चादरें नहीं बदली गई हैं। बेड में खून के धब्बे लगे हुए हैं। वार्ड में व्याप्त गंदगी से मरीजों के स्वस्थ होने की अपेक्षा और बीमार होने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय नागरिक राकेश कुमार कुकरेती, एनके उनियाल, विमल कुुमार द्विवेदी, पदमेंद्र सिंह रावत ने अस्पताल प्रशासन पर सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि जब से राष्ट्रपति शासन लगा है अस्पताल की सुध लेने वाला कोई नहीं है। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. आईएस सामंत ने बताया कि उन्हें अकस्मात कक्ष में गंदगी की जानकारी नहीं है। इसे दिखवाकर सफाई की व्यवस्था बनाई जाएगी।