बुधवार रात बारिश के बीच तापमान गिरते ही दुगड्डा और द्वारीखाल विकासखंडों की ऊंचाई वाली पहाड़ियों पर जमकर हिमपात हुआ। बृहस्पतिवार सुबह बर्फ से लकदक पहाड़ियों को देखकर स्थानीय लोगों के चेहरे खिल उठे। सिलोगी निवासी राजेंद्र सिल्सवाल, रुपचंद्र जखमोला का कहना है कि कई साल बाद सिलोगी में बर्फ पड़ी है। दुगड्डा के घाड़ क्षेत्र में स्थित चरेख डांडा में चौबीस साल बाद बर्फ पड़ने से क्षेत्रीय जनता के चेहरे खिल उठे। लोगों का कहना है कि बर्फबारी होने से इसका लाभ खेती किसानी और बागवानी में मिलेगा।
दुगड्डा निवासी शिवप्रसाद डबराल और चरेख के निवासी प्रमोद रावत ने बताया कि चरेख डांडा में दो दशक बाद बर्फबारी हुई है। गुमखाल समेत दुगड्डा, द्वारीखाल और यमकेश्वर की पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गई। कई क्षेत्रों में भारी बर्फबारी से पीने के पानी, बिजली की आपूर्ति ठप होने की समस्याएं भी पैदा हो गई हैं। गुमखाल के पास बैरगांव में भी इस बार पहाड़ियां बर्फ से लकदक हो गई हैं। भारी बर्फबारी से गुमखाल-द्वारीखाल-सिलोगी-गैंडखाल मार्ग पर कई पेड़ गिर गए हैं, जिससे सिलोगी क्षेत्र में यातायात ठप हो गया। द्वारीखाल, चैलूसैंण और सिलोगी क्षेत्र में एक भी यात्री वाहन नहीं चला।
गुजड़ूगढ़ी, दीवा गढ़ी समेत धुमाकोट की पहाड़ियां बर्फ से लकदक
धुमाकोट। क्षेत्र में तीन दिनों से हो रही बारिश के बाद बुधवार देर रात को जमकर बर्फवारी हुई। गुजड़ूगढ़ी, दीवागढ़ी पर्वत श्रृंखला के साथ ही तहसील मुख्यालय धुमाकोट, कसाना, दीवाखाल, लिस्टियाखेत, लिस्कोट, बंगला, नारदबांज, जमणधार, खत्ता, किनगोड़ीखाल, सांपखाल, रसिया महादेव, खाल्यूंडांडा आदि इलाकों में खूब बर्फबारी हुई। बर्फबारी के चलते काशीपुर बुआखाल हाईवे दीवा खाल के पास बाधित हो गया। दो जेसीबी मशीन की मदद से बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे मार्ग खोलकर यातायात बहाल किया गया। तापमान में भारी गिरावट से जनजीवन प्रभावित हो गया है। खराब मौसम और बर्फबारी के चलते बुधवार देर रात से बृहस्पतिवार सुबह तक कुछ घंटे बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। बर्फबारी के नजारे देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ ही सल्ड महादेव, शंकरपुर, मर्चूला, रामनगर, काशीपुर आदि इलाकों से पर्यटक धुमाकोट क्षेत्र में पहुंचने लगे हैं।
बर्फबारी खेती बागवानी के लिए अच्छी
धुमाकोट। बारिश तथा बर्फवारी को खेती-बाड़ी के लिए मुफीद समझा जा रहा है। सहायक कृषि अधिकारी विनोद पटवाल का कहना है कि बारिश तथा बर्फबारी खेती के लिए लाभदायक है। इसके साथ ही जलस्रोतों के जलस्तर में वृद्धि होने से गर्मियों में पेयजल की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। भूजल स्तर में भी सुधार होने की उम्मीद है।
महाबगढ़, खोबरा क्षेत्र में 1946 के बाद हिमपात
यमकेश्वर। क्षेत्र के महाबगढ़, खोबरा तथा काण्डाखाल आदि क्षेत्रों में बुधवार रात को जमकर बर्फवारी हुई। बुधवार को बारिश के साथ बर्फबारी से किसानों के चेहरे खिल उठे। बर्फबारी की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पर्यटकों ने महाबगढ़ का रुख किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि महाबगढ़, खोबरा आदि क्षेत्रों में वर्ष 1946 के बाद अब बर्फबारी हुई है। महाबगढ़ में जहां जमकर बर्फबारी हुई, वहीं खोबरा की पहाडियों पर दो इंच तक बर्फबारी हुई। बर्फबारी से पूरा इलाके में ठंड बढ़ गई है।