आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी करने की अनुमति देने के विरोध में शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से जुड़े कोटद्वार और पर्वतीय क्षेत्र के निजी अस्पताल और क्लीनिक बंद रहे। प्राइवेट अस्पताल व क्लीनिकों के बंद रहने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में हड़ताल के कारण 20 अस्पताल बंद रहे। यहां चिकित्सक कार्य बहिष्कार पर डटे रहे। आईएमए की कोटद्वार इकाई की यहां हुई बैठक में सरकार के निर्णय को जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताया गया।
प्राइवेट अस्पतालों के बंद रहने से ज्यादातर मरीज सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचे, जिससे सरकारी अस्पतालों की ओपीडी डेढ़ गुना रही। आमतौर पर दो सौ ओपीडी वाले सरकारी डॉक्टरों के चैंबर में डेढ़ गुना मरीज पहुंचे। बेस अस्पताल के प्रबंधक बीएस रावत ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सामान्य दिनों की अपेक्षा ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी रही। आईएमए के पूर्व सचिव डा. विजय मैठाणी ने कहा कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले निर्णय ले रही है।
आयुष चिकित्सकों ने निशुल्क किया उपचार
कोटद्वार। आईएमए की हड़ताल के विरोध में आयुर्वेद चिकित्सकों ने शुक्रवार को निशुल्क उपचार किया। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के बैनर तले आयुर्वेद चिकित्सकों ने दोगुना काम किया। आयुर्वेद चिकित्सकों ने आयुर्वेद छात्रों और डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति दिए जाने का स्वागत किया। कहा कि आयुष चिकित्सक पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में आम जनमानस को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान कर रहे हैं। नीमा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डा. जयवीर सिंह बिष्ट ने बताया कि शुक्रवार को आयुष चिकित्सकों ने अपनी ओपीडी निशुल्क रखी। ब्यूूरो