यदि आप कोटद्वार से दुगड्डा के बीच हाईवे पर आवाजाही कर रहे हैं तो कृपया सावधानी बरतें। मार्ग पर हाथी झुंडों और टस्कर का खतरा बढ़ गया है। हाथी दिखाई भी दे जाय तो दूर ही वाहन खड़ा कर लें। इस दौरान हार्न बजाना, पत्थर फेंकना जैसे काम न करें। इससे हाथी चिढ़ सकता है और आपकी जान जोखिम में पड़ सकती है। खासकर टस्कर को तो कतई न चिढ़ाएं।
लैंसडौन वन प्रभाग के अंतर्गत कोटद्वार-दुगड्डा का इलाका शिवालिक एलीफेंट कॉरिडोर के सोनानदी-रवासन में पड़ता है। यह पहले से ही हाथी बाहुल्य क्षेत्र है। इन दिनों एक टस्कर सड़क के करीब देखा जा रहा है लेकिन कई लोग पत्थर मारकर और वाहनों के हार्न बजाकर उसे चिढ़ा रहे हैं। ऐसा करना पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो हाथी शांतिप्रिय जानवर है और जल्दी से किसी पर हमला नहीं करता है। अगर एक बार वो चिढ़ गया तो संभालना मुश्किल हो जाता है। बुधवार को भी लोगों के चिढ़ाने पर एक टस्कर आक्रोशित हो गया था। वह वाहनों पर हमला करने को तैयार हो गया था। इस दौरान सड़क से गुजर रहे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी अपना वाहन छोड़कर ऊंची पहाड़ी पर चढ़कर जान बचानी पड़ी।
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वन विभाग की लोगों से अपील
हाथी के दिखने पर वाहन के डिपर, टार्च और हार्न का प्रयोग न करें। हाथी से कम से कम 200 मीटर से अधिक की दूरी बनाए रखें। हाथी पर पत्थर न मारें, नजदीक जाकर फोटो खींचने का प्रयास न करें। हाईवे पर हाथी के दिखने पर इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें।
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लोग हाथी पर पत्थर मार रहे हैं, यह गंभीर बात है। ऐसे में हाथी के चिढ़ने से वह जानलेवा हमला कर सकता है। ऐसी घटना को रोकने के लिए वन कर्मियों को हाईवे पर तैनात किया गया है। हाथी को चिढ़ाते हुए पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - प्रमोद डोबरियाल, रेंज अधिकारी, दुगड्डा।