हेरी कसम ई स्वाणी रीतू मां ऐजा और रौतेली डांड्यू मा ऐगे बसंत हिवाली मां जैसे लोकप्रिय गीत लिखने वाले प्रसिद्ध गीतकार और गायक धुव्रनारायण डोभाल का बदरीनाथ में निधन हो गया। वह 60 वर्ष के थे। उनके स्वर्गवास की खबर सुनकर क्षेत्र के संगीत प्रेमियों और जनता में शोक की लहर दौड़ पड़ी।
मूल रूप से देवप्रयाग के रहने वाले डोभाल कुछ समय से बदरीनाथ में कीर्तनाचार्य के रूप में भजन संध्या का काम कर रहे थे। दो दिन पहले उनका अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया। अस्पताल ले जाते समय उन्होंने प्राण त्याग दिए।
डोभाल क्षेत्र के ख्यातिनाम गीतकार और गायक थे। हालांकि आर्थिक तंगी से उनको गीत-संगीत की दुनिया में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वह हकदार थे। उन्होंने स्वरचित गढ़वाली, हिंदी गीतों और मधुर भजनों को सुर दिए थे। वह लंबे समय तक आकाशवाणी के नजीबाबाद स्टेशन से जुड़े रहे। 1975 में बॉलीवुड के प्रसिद्ध संगीतकार जयदेव ने उनके गीतों की रिकार्डिंग भी की थी।
बदरीनाथ- केदारनाथ उत्सव, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव और देवप्रयाग की रामलीला में उनकी खासी पहचान थी। उन्होंने दर्जनों गीत लिखे। उन्होंने अंतिम गीत गंगा मैया का जिसने नाम लिया वह प्राणी तर जाएगा लिखा था। प्रसिद्ध गीतकार चंद्र सिंह राही और संजय किशन ध्यानी सहित अन्य गायकों ने उनके लिखे गीतों को अपनी आवाज दी थी। संगीतकार बसंतलाल अलखनिया, ओमप्रकाश ध्यानी, पूर्ण प्रकाश कोटियाल, विनोद भटट, प्रकाश कोटियाल, सुभाष ध्यानी, उत्तम भट्ट और गेंदालाल ध्यानी ने इस अपूरणीय क्षति बताया।