कण्वघाटी/कोटद्वार। हरिद्वार और रुड़की की तरह ही पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार भाबर क्षेत्र की सहकारी समितियों में डीएपी और एनपीके खाद खत्म हो गई है। गेहूं की फसल के लिए किसानों ने खेतों में हल तो लगा लिया, लेकिन बिना डीएपी की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। किसानों को डीएपी के लिए यूपी के नजीबाबाद क्षेत्र में प्राइवेट दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
काश्तकार जेपी बहुखंडी, कुबेर जलाल, वीरेंद्र सिंह, मनोज शर्मा, मोहन लाल केष्टवाल और वीरेंद्र केष्टवाल आदि का कहना है कि भीमसिंहपुर सहकारी समिति में डीएपी और एनपीके खाद खत्म हुए एक माह का समय हो गया है। समिति में खाद के नाम पर केवल यूरिया उपलब्ध है। बुआई के लिए शुरू में डीएपी अथवा एनपीके खाद की आवश्यकता होती है। मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों में डीएपी और एनपीके ख़रीदनी पड़ रही है। क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के किसान खाद के लिए सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं।
वहीं, काश्तकार विजय नैथानी, सुनीता देवी, मनोज जोशी, मनोज गौड़, दीनदयाल थपलियाल, मुन्नी देवी ने बताया कि उनके क्षेत्र में स्थित मोटाढाक सहकारी समिति में नौ नवंबर से एनपीके उपलब्ध नहीं है। समिति में सिर्फ 280 बैग एनपीके आए थे, जबकि क्षेत्र के किसानों के लिए 600 बैग की जरूरत है। समितियों की उदासीनता को लेकर किसानों में आक्रोश व्याप्त है। आक्रोशित किसानों ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों से जल्द ही सहकारी समितियों में डीएपी और एनपीके खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। मोटाढाक सहकारी समिति के सचिव सुदेश उनियाल व लछमपुर की सचिव शर्मिला राणा ने बताया कि इफको के अधिकारियों को डिमांड भेजी गई है।