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बारिश और ओलावृष्टि से फसलें हुई तबाह, काश्तकार परेशान

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बीते दो दिन से लगातार हो रही भारी बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि से मैदान और पर्वतीय क्षेत्र में गेहूं की फसल तबाह हो गई है। कृषि और बागवानी को भारी नुकसान पहुंचा है। फसलें बर्बाद होने से काश्तकारों के माथे पर बल पड़ गए हैं। काश्तकारों को फसल की चिंता सताने लगी है।
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भाबर के झंडीचौड़, लोकमणिपुर, उदयरामपुर, किशनपुर, मगनपुर, रामदयालपुर आदि क्षेत्रों में बारिश, अंधड और ओलावृष्टि से काश्तकारों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। काश्तकार कुबेर जलाल, जगत सिंह सौंद, भूपेंद्र जलाल, वीरेंद्र केष्टवाल, वचन सिंह रावत, वीरेंद्र सिंह पाल, हरेंद्र मेहरा, मुकेश कुमार हरि सिंह मेहरा, रविंद्र कुमार, भूपेंद्र सिंह रावत, मनोज बिंजोला का कहना है कि बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि और अंधड़ से गेहूं, सरसों, चना के साथ ही आलू की अगेती फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। अंधड़ से गेहूं की फसल लेट गई है। गेहूं की बाली काली पड़ने लगी है। अंधड़ और ओलावृष्टि से आम, लीची और पपीते के फूल झड़ने से इनकी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बची-खुची फसलों में भी बीमारी लगने की आशंका बनी हुई है। यमकेश्वर, द्वारीखाल, जयहरीखाल, लैसडौन और धुमाकोट में भी जमकर ओलावृष्टि हुई, जिससे फसलें खराब हो गई हैं।
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