जब शासन-प्रशासन ने कोटा गांव की सुध नहीं ली तो गांववालों ने खुद ही अपनी सुरक्षा के लिए मोर्चा संभाल लिया। गुलदार से बचाव और सुरक्षा के लिए ग्रामीणों ने गांव की सड़क और प्राथमिक स्कूल परिसर में झाड़ियों के कटान का काम शुरू किया है।
यकेश्वर ब्लाक के कोटा गांव में गुलदार से बचाव के लिए ग्रामीणों ने खुद कमर कसी है। रविवार को बैठक कर ग्रामीणों ने इसके लिए सबसे पहले गांव की सड़क और स्कूल परिसर में सफाई अभियान चलाने का निर्णय लिया। सड़क के किनारे की झाड़ियां काटी गई ताकि गुलदार को छिपने की जगह न मिल सके। ग्राम प्रधान प्रभा देवी ने बताया कि लोगों को शासन-प्रशासन पर भरोसा नही रह गया है।
विदित है कि कोटा गांव महीने भर से गुलदार का आतंक फैला हुआ है। आठ जुलाई को गुलदार दिनदहाड़े प्राथमिक स्कूल में आ धमका। इससे पहले वह 12 जून को गांव में एक बच्चे को शिकार बना चुका है। लोग तब से गुलदार को मारने की मांग कर रहे हैं लेकिन शासन-प्रशासन ने अब तक उनकी सुध नहीं ली।
हालांकि राजाजी पार्क प्रशासन ने इसे मारने के लिए शिकारी दल गठित किया था लेकिन वह भी चार दिन गांव में रहने के बाद लौट आया। आदमखोर गुलदार के भय से लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं।
रविवार को स्वर्गाश्रम में नीलकंठ मेला बैठक के दौरान एसडीएम और राजाजी पार्क के वार्डन को गांव की पूूरी घटना से अवगत कराया गया और सुरक्षा इंतजाम किए जाने की मांग की गई। मामले की जानकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को भी दी गई है। उन्होंने इस बारे में मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया है।
-गीता राणा, जिला पंचायत सदस्य, भादसी यमकेश्वर
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मुझे इस बात की जानकारी नही है कि शिकारी टीम गांव से क्यों लौट आई। संबंधित रेंज अधिकारी से जानकारी लेेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। गांव में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
-नीना ग्रेवाल, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व