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पति, सास और ससुर को सात-सात साल की सश्रम कैद

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कोटद्वार। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहदेव सिंह की अदालत ने कोटद्वार के काशीरामपुर में वर्ष 2014 मेें दहेज के लिए हुई लक्ष्मी देवी की हत्या में पति, सास और ससुर को दोषसिद्ध पाते हुए तीनों को 7-7 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई है। तीनों अभियुक्तों पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि भी दंडादेश में समायोजित करने के आदेश कोर्ट ने दिए हैं। इसी मामले में कोर्ट ने मृतका की दीदी और जीजा को दोषमुक्त करार दिया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता नसीम बेग ने बताया कि यह मामला 30 नवंबर 2014 का है। घटना वाली सुबह पुलिस ने ग्राम काशीरामपुर तल्ला निवासी राजमोहन के आवास से ग्राम चमस्यूल निवासी लक्ष्मी देवी (25) पत्नी सुशील गुसाईं का शव बरामद किया था। बताया गया कि लक्ष्मी बीमारी के चलते अपने जीजा राजमोहन के आवास पर आई थी। उसका शव चुन्नी के सहारे छत पर लगे पंखे के हुक से लटका था। उसके पिता अमरजीत सिंह ने बेटी के ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। कोतवाली पुलिस ने पति सुशील सिंह, ससुर श्याम सिंह, सास विमला देवी के साथ ही जीजा राजमोहन और उसकी पत्नी अनीता देवी के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज किया। इस मामले की विवचेना पूर्ण कर पुलिस ने संबंधित न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। निचली कोर्ट ने यह मामला एडीजे कोर्ट के सुपुर्द कर दिया गया।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए मृतका के जीजा राजमोहन और उनकी पत्नी अनीता देवी को दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियुक्त सुशील सिंह, श्याम सिंह और विमला देवी के विरुद्ध दोष सिद्ध हुआ है।
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