नोट बंदी के 50 दिन पूरा होने के बाद भी लोग अपने रुपयों के लिए आज भी बैंकों और एटीएम में भटकने को मजबूर हैं। कोटद्वार और निकटवर्ती क्षेत्र की बैंक शाखाओं में पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं होने के कारण अधिकतर एटीएम बंद पड़े हुए हैं। बृहस्पतिवार को कोटद्वार के अधिकतर बैंकों के एटीएम बंद रहे।
स्टेट बैंक की कुछ शाखाओं में कैश समाप्त होने के कारण लोग दिन भर परेशान रहे। एक आध बैंक के एटीएम खुला होने पर दिन भर एटीएम में दो हजार रुपये के लिए लाइन लगी रही। बैंक उपभोक्ता सुधीर बहुगुणा ने बताया कि उनका खाता स्टेट बैंक की पदमपुर सुखरौ ब्रांच में है, जहां विगत एक सप्ताह से करंसी की कमी चल रही थी।
पहले लोगों को सात दिन में 24 हजार की जगह में मात्र छह हजार रुपये दिए जा रहे थे। वर्तमान में दो दिन से बैंक के पास करंसी नहीं है। इसके कारण लोगों के पास बैंक खाते में पैसा होते हुए भी खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। यही हाल बैंक की अन्य शाखाओं का भी है।
पाटीसैंण स्टेट बैंक के उपभोक्ता रविंद्र सिंह ने बताया कि नोटबंदी के पास एक दिन के लिए एटीएम खुला था, तब से आज तक एटीएम बंद हैं। बैंक के काउंटर से लोगों को सात दिन में दो-दो हजार रुपये पकड़ाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
नोट बंदी का सबसे अधिक असर वृद्ध पेंशनरों पर पड़ रहा है। बैंक उन्हें पर्याप्त पैसा नहीं दे रहा है। उनके पास एटीएम कार्ड नहीं होने पर वे स्वैप मशीन का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। 85 वर्षीय जानकी देवी ने बताया कि उन्हें कभी एटीएम कार्ड की जरूरत नहीं पड़ी। पहले वह चेक काटकर अपनी पेंशन मंगा लिया करती थी, लेकिन वर्तमान में चेक द्वारा भी पूरा पैसा नहीं मिल रहा है। ऐसे में उन्हें अपनी दवाइयों आदि को खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।