राठ क्षेत्रवासियों की आराध्य देवी मां कालिंका बूंखाल के दरबार में लगे मेले का रूप इस बार भी दिनभर बदलता गया। मेले में देवी देवताओं की डोली पहुंचते ही मेले का रूप पूरी तरह बदल गया। मंदिर परिसर में अधिकतर श्रद्धालु ढोल दमाऊं के स्वरों और देवी के उद्घोषों पर थिरकते रहे। क्षेत्रवासियों, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के प्रयासों से वर्ष 2011 से लोगों को रक्तहीन क्रांति का संदेश दे रहे इस मेले के दौरान अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट-
चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
सुबह आठ बजे : खिर्सू से लेकर मंदिर तक जाने वाले सभी मार्गों पर बनी चेक पोस्टों, चौरीखाल रोड से मंदिर परिसर तक पुलिस बल तैनात है। मेले में जाने वाले हर वाहनों की चेकिंग हो रही है। बूंखाल मंदिर में पुजारी लोग हवन की तैयारी में जुटे हैं। कुछ लोग पशुबलि बंद होने के बाद मेले में आए बदलाव पर चर्चा कर रह हैं।
हवन पूजन शुरू,
सुबह नौ बजे : बूंखाल मंदिर परिसर में हवन, पूजन शुरू होता है। सभी जगहों से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ना शुरू हो जाता है। बड़ी संख्या में लोग हवन, पूजन में शामिल होते हैं। देवी के कुंड में नारियल चढ़ने शुरू हो जाते हैं।
देवी के दर्शनों के लिए जद्दोजहद
सुबह 11 बजे : बूंखाल कालिंका के मंदिर में देवी के दर्शनों के लिए आ रहे लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है। मंदिर परिसर में देवी मूर्ति के दर्शन और पूजा अर्चना के लिए, बलि कुंड में तेल और नारियल चढ़ाने के लिए लोगों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। आयेाजकों द्वारा शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। मंदिर परिसर में एक दो लोग नशे में झूमते हुए पहुंचे जिससे लोगों को दिक्कतें भी उठानी पड़ रही है। चौरीखाल से बूंखाल मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से पट जाता है।
माता के उद्घोष गूंजे
12 से तीन बजे : चोरीखाल से बूंखाल तक पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से पट जाता है। मंदिर में पूजा, अर्चना जारी है। कई लोग मां कालिंका बूंखाल के मंदिर से ऊपर स्थित शिव मंदिर में भी पूजा अर्चना करने जा रहे हैं। दो बजे से मंदिर में देवी देवताओं की डोलियों का आगमन शुरू हुआ। पहले शूक्र गांव की डोली पहुंची है। इसके बाद मिलई, नलई, गोदा और मलुंड आदि गांवों की डोलियां मंदिर पहुंचीं। पूरा बूंखाल क्षेत्र ढोल दमाऊं की थाप से गूंज रहा है। राजकीय इंटर कालेज चौरीखाल में गढ़कला सांस्कृतिक कला मंच के कलाकारों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर लोक गायक अनिल बिष्ट के निर्देशन में मनोज रावत अंजुल, प्रेम बल्लभ पंत, अंजलि और मीनाक्षी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।