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छह हजार में तैयार किया बायो गैस प्लांट

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कोटद्वार के मानपुर निवासी एक सेवानिवृत्त अधिकारी गजेंद्र सिंह चौहान ने सिर्फ छह हजार रुपये में बायो गैस प्लांट तैयार किया है। ये एलपीज का सस्ता और प्रदूषण रहित विकल्प है। बायो गैस प्लांट में किचन वेस्ट से घरेलू गैस बनाई जा रही है। इसके लिए गोबर गैस प्लांट से बहुत कम जगह की जरूरत होती है।
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गजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि बायो गैस प्लांट की जानकारी उन्हें पहले से ही थी। इसके साथ ही उन्होंने गूगल और यूट्यूब की मदद से बायो गैस प्लांट बनाने की सोची।
पांच लीटर किचन वेस्ट की जरूरत
बायो गैस प्लांट के लिए पांच लीटर किचन वेस्ट की जरूरत होती है। जितनी मात्रा में किचन वेस्ट हो, उतनी ही मात्रा में उसमें पानी मिलाकर इनलेड डिवाइस में डाला जाता है। बायो गैस प्लांट में 65 फीसदी मीथेन और 35 फीसदी कार्बन डाई आक्साइड गैस बनती है। एलपीजी गैस के मुकाबले बायो गैस में प्रेशर कम होता है। इसलिए बायो गैस प्लांट किचन के नजदीक होना चाहिए। बायो गैस प्लांट का चूल्हा बाजार में आसानी से मिल जाता है। इसके चूल्हे में एलपीजी चूल्हे की तरह आक्सीजन स्लॉट नहीं होता है। साथ ही सामान्य चूल्हे की अपेक्षा इसके चूल्हे के छिद्र बड़े होते हैं। शुरुआत में टैंक को भरने के लिए गोबर और पानी की आवश्यकता होती है। जितनी मात्रा में गोबर हो, उतनी मात्रा में पानी होना चाहिए और एक सप्ताह तक उसे छोड़ दिया जाता है। गोबर में बैक्टीरिया उत्पन्न होने के बाद इसमें किचन वेस्ट डालकर रोजाना गैस प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि एक मध्यम परिवार के लिए 500 लीटर का टैंक पर्याप्त है।
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बायोगैस संयंत्र के कई फायदे
गजेंद्र चौहान बताते हैं कि बायोगैस संयंत्र के कई फायदे हैं। इससे प्रदूषण नहीं होता है। बायोगैस उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा पदार्थ घर के किचन में ही प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। इनसे सिर्फ बायोगैस का उत्पादन ही नहीं होता बल्कि फसलों की उपज बढ़ाने के लिए समृद्ध खाद भी मिलती है। बायो गैस धुंआ मुक्त और प्रदूषण रहित संयंत्र है।
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300 लीटर की क्षमता का बनाया टैंक
गजेंद्र चौहान ने 300 लीटर क्षमता का टैंक बनवाया। इसका डिजाइन उन्होंने खुद ही तैयार किया। टैंक में चार इंची प्लास्टिक के पाइप से इनलेड डिवाइस तैयार की गई। इसमें किचन वेस्ट डाले जाते हैं। टैंक से अवशेष पदार्थों को निकालने के लिए ड्रेन आउट प्वाइंट और ओवरफ्लो प्वाइंट भी दिए गए हैं। अवशेष पदार्थ को खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। टैंक के ऊपर 300 लीटर की टंकी का ऊपरी हिस्सा काटकर लगाया गया है। टंकी के ऊपर छेद कर गैस सप्लाई के लिए प्वाइंट बनाया और पाइप को जोड़कर किचन के चूल्हे से जोड़ा गया है।
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