संवाद न्यूज एजेंसी
पौड़ी। जिला मुख्यालय पौड़ी में बेडू (हिमालयी अंजीर) को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्राप्त हुआ है। पौड़ी ब्लॉक में महिला समूहों की ओर से पिछले दो सालों में बेडू प्रसंस्करण इकाई में बेडू से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत गठित उमंग स्वायत्त सहकारिता बिचली ढांढरी ने पेटेंट, डिजाइन व ट्रेडमार्क महानियंत्रक को जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया था। बेडू प्रसंस्करण इकाई को स्थापित करने में रीप, कृषि, उद्यान, केवीके भरसार के साथ ही ह्यूमन वैलफेयर एसोसिएशन वाराणसी के डॉ. रजनीकांत ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया था। इकाई के लिए प्रशासन की ओर से 2.50 लाख की वित्तीय सहायता भी मुहैया करवाई गई थी। वर्तमान में फेडरेशन के अंतर्गत 31 गांवों के 62 स्वयं सहायता समूहों की 388 महिलाएं जुड़ी हुईं हैं। फेडरेशन किसानों से 60 रुपये प्रति किलो की दर से बेडू खरीदकर जैम, चटनी, स्क्वैश, मिठाई आदि उत्पाद तैयार कर रहा है। इनका विपणन हिलांस ब्रांड के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ ही देश के कई प्रातों में किया जा रहा है।
डीएम स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि बेडू का जीआई टैग मिलने से पौड़ी की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को भी मान्यता मिली है। इससे स्थानीय किसानों व महिला समूहों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
उमंग फेडरेशन की अध्यक्षा उमा देवी ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया। कहा कि जीआई टैग मिलने से अब बेडू उत्पादों के मूल्य में वृद्धि होगी और इससे स्थानीय किसानों एवं महिला समूहों की आय में सीधा लाभ प्राप्त होगा।