आइसा की ओर से चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियान ‘उठो मेरे देश’ के तहत गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर में ‘भगत सिंह-अंबेडकर के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जनता की कमाई लूटने वाले देशद्रोही नहीं होते हैं बल्कि आदिवासी, गरीबों, किसानों की बात करने वाले देशद्रोही हो जाते हैं।
बुधवार को बिड़ला परिसर में हुई गोष्ठी के दौरान आइसा के अंकित उछोली ने भगत सिंह का अछूत समस्या पर लिखा लेख पढ़ा। आइसा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अतुल सती ने कहा कि देशभक्ति व देशद्रोह में बहस करा कर जनता को वास्तविक मुद्दों से भटकाया जा रहा है। देश में शिक्षा, रोजगार, किसानों, वंचितों के मुद्दों को राष्ट्रीयवादी लोग दबाना चाहते हैं। प्रो. आरसी डिमरी ने कहा कि विरोधाभासों के बावजूद एक होना भारत की ताकत है। इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि हम भारत को भगत सिंह व अंबेडकर का देश बनाना चाहते हैं। जिसमें मजदूरों, किसानों, दलितों व वंचितों की बात हो।
भाकपा माले के गढ़वाल सचिव अतुल सती ने कहा कि उत्तराखंड में जिस तरह संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है, उससे आज के दौर में अंबेडकर की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। कार्यक्रम में सुमित रिंगवाल, शिवानी पांडेय, उत्तम पंवार, महेश भट्ट, काजल चमोाला, प्रियंका नेगी, रविंद्र बर्तवाल आदि मौजूद थे।
परीक्षा केंद्र में गोष्ठी पर जताई आपत्ति
श्रीनगर। बिड़ला परिसर परीक्षा केंद्र होने के कारण यहां धारा 144 लागू है। बावजूद इसके यहां गोष्ठी कराने पर अभाविप ने आक्रोश जताया है। गोष्ठी के दौरान घपले की आशंका को देखते हुए शांति व्यवस्था के लिए परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। स्वयं कोतवाल व गढ़वाल विवि के मुख्य नियंता, डीएसडब्ल्यू गोष्ठी में मौजूद थे। अभाविप के ऋतांशु कंडारी ने कहा कि परीक्षा केंद्र में धारा 144 के दौरान ऐसे संवेदनशील कार्यक्रमों के लिए अनुमति देना गलत है। वहीं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि धारा 144 का उल्लंघन नहीं किया गया है।