कोटद्वार। श्री सिद्धबली बाबा महोत्सव के अंतिम दिन देश के प्रसिद्ध भजन गायक लखवीर सिंह लक्खा के भजनों का जादू श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोला। हजारों की तादाद में भजन संध्या में पहुंचे श्रद्धालु देर शाम तक लक्खा के भजनों पर झूमते रहे।
रविवार को मंदिर परिसर में आयोजित भजन संध्या का मंदिर के महंत दिलीप रावत ने शुभारंभ किया। उन्होंने मंदिर प्रांगण को सिद्धों की भूमि बताया। कहा कि इस स्थान पर सिद्धबाबा ने कड़ी तपस्या करते हनुमानजी को प्रकट किया था। श्री सिद्धबली बाबा के दरबार में जो भी सच्ची श्रद्धा के साथ आता है, बाबा उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। उन्होंने तीन दिवसीय महोत्सव को संपन्न कराने में सहयोग के लिए महोत्सव में सेवा दे रहे लोगों और क्षेत्रवासियों का आभार जताया।
दोपर तीन बजे शुरू हुई भजन संध्या में पहले लक्खा के साथ कोलकाता से पहुंचे संगीतकारों ने अपने संगीत से समा बांधा। इसके बाद लखवीर सिंह लक्खा ने भजनों की शुरुआत रामचरित मानस की चौपाई राम सिया राम सिया राम जै जै राम.. से की। इसके बाद जय हो बजरंग बली, बोलो जय बजरंग बली.. भजन पर दर्शकों ने तालियां बजानी शुरू कर दीं। सजा है दरबार ए पवन कुमार.. पर श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। इसके बाद भजन लहर लहर लहराए रे झंडा बजरंग बली का.. भजन पर महिलाएं अपने स्थान पर खड़ी होकर झूमने लगीं। हनुमान जी की झांकी लाल लंगोटा हाथ में सोटा चले पवन की चाल में हनुमान की झांकी पर लोगों ने फूल बरसाए। इसके बार लक्खा ने सजा है दरबार तेरा जै बजरंगी.., सुबह शाम आठों याम यही काम किए जा, खुश होंगे हनुमान राम राम किए जा.., छम छम नाचे देखो बीर हनुमाना... के अलावा शिवजी, राधा-कृष्ण और माता के भजनों पर देर शाम तक श्रद्धालु झूमते रहे। शिव पार्वती, काली की झांकी, मटका तोड़ और राधा-कृष्ण की फूलों की होली ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया।
इस अवसर पर स्वास्थ्यमंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, महंत दिलीप रावत, महोत्सव संयोजक उद्योगपति अनिल कंसल, शैलेंद्र सिंह बिष्ट, मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंजबिहारी देवरानी,पूर्व विधायक भारत सिंह रावत, रमेशचंद्र सिंह रावत, शिव प्रसाद पोखरियाल, रविंद्र जजेड़ी, सुनील बहुगुणा, रविंद्र सिंह नेगी,धर्मवीर गुसाईं, विपिन कैंथोला, ओम प्रकाश तिवारी, शिव कुमार अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, अनिल बिट्ठल, जीत सिंह पटवाल आदि मौजूद थे।
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