गुलदार के डर से गांव अल्दावा का एक और परिवार पलायन कर गया है। मजबूरन दुगड्डा बाजार में किराए के मकान पर शिफ्ट होना पड़ा। बीते 11 सितंबर को गांव में एक व्यक्ति पर गुलदार के हमले के बाद ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। तीन दिनों से परिवार बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहा था।
गांव के दो बच्चे तीन दिनों से दुगड्डा स्कूल नहीं जा पा रहे थे। ग्रामीणों ने स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की वनकर्मियों के पहरे के बीच सुरक्षित दुगड्डा आवाजाही कराने की मांग की थी। वन विभाग ने वन कर्मियों की कमी बताकर हाथ खड़े कर दिए। इस पर बच्चों के भविष्य को देखते परिवार ने गांव से पलायन का निर्णय लिया।
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ग्रामीण सुदर्शन ने बताया कि उनकी बेटी जीजीआईसी दुगड्डा में हाईस्कूल में पढ़ती है। बेटा जीआईसी दुगड्डा में इंटरमीडिएट में पढ़ता है। गुलदार के डर से गांव से आना जाना संभव नहीं है। दुगड्डा से गांव की पैदल दूरी करीब तीन किमी है।
सड़क मार्ग से गांव की दूरी आठ किमी पड़ती है। वन मोटर मार्ग होने के कारण सड़क बदहाल है। बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। सुदर्शन अपनी वृद्ध मां करोली देवी, पत्नी ज्योति देवी और दोनों बच्चे शिल्पा व यशवंत को लेकर दुगड्डा में शिफ्ट हो गए हैं।
अल्दावा गांव से बीते दो दशकों में 44 परिवार पलायन कर चुके हैं। अब वन्यजीवों का आतंक ज्यादा बढ़ गया है। गुलदार के साथ ही बाघ भी गांव के आसपास मंडराता रहता है। ग्रामीण लंबे समय से गांव की सड़क को चौड़ा और पक्का बनवाने या फिर उन्हें दूसरी जगह विस्थापित करने की मांग कर रहा है। हालात यह हैं कि शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि बेसुध हैं।
-माधुरी देवी, ग्राम प्रधान अल्दावा