आंचल डेरी(गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ) के कर्मचारी संगठन के दो पदाधिकारियों को प्रबंधन ने निलंबित कर दिया है। उन पर कर्तव्य के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता, स्वैच्छारिता, मनमर्जी और डेरी की छवि धूमिल करने का आरोप है। एक पदाधिकारी पर जालसाजी का भी आरोप है। डेरी विकास विभाग के निदेशक/निबंधक ललित मोहन रयाल ने विस्तृत जांच के लिए दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ टिहरी के प्रबंधक मदन मोहन पंत को जांच अधिकारी नामित किया है।
बार-बार कर्मचारियों की हड़ताल, लापरवाही और मनमानी से परेशान डेरी विकास विभाग व गढ़वाल दुग्ध संघ ने सख्त कार्रवाई के संकेत दे दिए हैं। दुग्ध संघ ने विभिन्न आरोपों के आधार पर दुग्ध कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष अरुण शर्मा और संरक्षक गोवर्धन प्रसाद गिरी को निलंबित कर दिया है।
शर्मा आंचल डेरी में मूल रूप से ब्वायलर अटेंडेंट हैं। उन्हें यातायात/विपणन प्रभारी की जिम्मेदारी दी हुई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने 25 अप्रैल 2015 से 5 जुलाई 2015 तक प्रमाणपत्र लगाते हुए चिकित्सा अवकाश मांगा है। जबकि उन्होंने इसी दौरान अपने स्थानांतरण के विरुद्ध उच्च न्यायालय में रिट दायर भी की। इससे साबित होता है कि वह उस अवधि में स्वस्थ थे। इसे प्रबंधन ने जालसाजी माना है। शर्मा 8 मार्च से 22 मार्च तक आमरण अनशन पर रहे। इसके बावजूद उन्होंने एक ही दिन में उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर कर दिए। शर्मा ने देहरादून में तैनाती के दौरान का भुगतान भी नहीं किया है। वर्ष 2008 में उन्होंने रंगरोगन कार्य कराया। इसमें उन्होंने अत्यधिक मजदूरी का भुगतान दर्शाया।
वहीं इलैक्ट्रीशियन पद पर तैनात गिरी ने यांत्रिकी प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के दौरान 20 जनवरी से 25 जनवरी के बीच लगभग 70 हजार रुपये का डीजल खरीदा। बावजूद इसके उसे लॉग बुक में दर्ज नहीं किया। संस्था में गिरी सहित दो-दो इलैक्ट्रीशियन होने पर भी मोटर की मरम्मत के लिए बाहर से इलैक्ट्रीशियन बुलाया गया।
कर्मचारी सेवा नियमावली का उल्लंघन करने के आरोप में प्रधान प्रबंधक राम प्रसाद ने दोनों कर्मचारियों को निलंबित करने और विस्तृत जांच के लिए निबंधक को पत्र भेजा था। निबंधक से अनुमोदन होने के बाद प्रधान प्रबंधक ने दोनों को निलंबित करते हुए सहायक निदेशक डेरी विकास विभाग कार्यालय से संबद्ध कर दिया है।