सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) दिल्ली से अभियंताओं की टीम ने लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को कंक्रीट सड़क की जानकारी दी। इस दौरान लोनिवि से करीब 96 इंजीनियर मौजूद रहे। इनमें पौड़ी के अलावा हरिद्वार, श्रीनगर, लैंसडौन, दुगड्डा, कोटद्वार के अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग के अभियंता भी मौजूद रहे।
विकास भवन में आयोजित वर्कशाप के दौरान मुख्य तौर पर पहुंचे सीआरआरआई के अभियंता विनोद कुमार ने सीमेंट कंकरीट रोड के बारे में बताया कि डामर की सड़क की अपेक्षा सीमेंट कंक्रीट से बनने वाली सड़क की उम्र अधिक होती है।
कंक्रीट से बनने वाली सड़क की कास्ट भले ही अधिक होती है, लेकिन यह सड़क 25 से 30 साल तक खराब नहीं होती, जबकि डामर वाली सड़क पांच से छह साल में खराब होने लगती है। यदि दोनों किस्म की सड़कों की कास्ट एक समान ही होती है, लेकिन कंक्रीट सड़कें कम ही बनायी जा रही हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग के अभियंताओं को भी कंक्रीट सड़क बनाने के लिए प्रेरित किया। वर्कशाप के दौरान टीम ने कंक्रीट की सड़क कम लागत में कैसे बनाई जा सकती है, इस बारे में भी जानकारी दी। वर्कशाप के बाद लोनिवि के अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय के दौरान वह डीपीआर में कंक्रीट सड़क ही डालेंगे ताकि सड़क अधिक देर तक चल सके।
इस मौके पर विभाग के मुख्य अभियंता लोकेश शर्मा के अलावा एसई गढ़वाल डीएन चौधरी, रुद्रप्रयाग से ओम प्रकाश, जीएस आर्य, हरिद्वार से एसके राय, अभियंता निर्भया सिंह व सुरेश तोमर सहित गढ़वाल मंडल के अभियंता मौजूद रहे।