वर्ष 2013 जून माह की आपदा प्रभावित भक्तियाना क्षेत्र के 86 परिवारों को मुआवजा मिलेगा। इन परिवारों में भवन स्वामी व किराएदार शामिल हैं। एनजीटी के आदेश पर अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी 9.26 करोड़ की राशि 30 दिन के भीतर सार्वजनिक देयता बीमा अधिनियम के तहत पर्यावरण राहत कोष प्राधिकरण में जमा कराएगी, जिसे जिला प्रशासन के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों में वितरित किया जाएगा।
बृहस्पतिवार को माटू संगठन व श्रीनगर बांध आपदा संघर्ष समिति के विमल भाई ने पत्रकार वार्ता में बताया कि एनजीटी ने श्रीनगर में तबाही के लिए जल विद्युत परियोजना कंपनी को दोषी माना है। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) ने कंपनी को एक माह के भीतर 9.26 करोड़ रुपये पर्यावरण राहत कोष प्राधिकरण में जमा करने के आदेश दिए हैं।
जिसे जिला प्रशासन के माध्यम से पीड़ित 86 परिवारों में वितरित किया जाएगा। इस मौके पर प्रेम बल्लभ काला, विजय लक्ष्मी रतूड़ी, चंद्रभानु तिवाड़ी, निर्मला नौटियाल व चंद्र मोहन भट्ट आदि शामिल थे।
क्या था मामला
वर्ष 2013 जून माह की आपदा के दौरान शहर क्षेत्र का निचला हिस्सा (भक्तियाना, शक्तिविहार ) अलकनंदा की बाढ़ में जलमग्न हो गया था। स्थानीय निवासियों ने इस आपदा के लिए जल विद्युत परियोजना कंपनी को दोषी ठहराया था, जिस पर माटू व श्रीनगर बांध आपदा संघर्ष समिति ने मुआवजे की मांग के लिए एनजीटी में याचिका दायर की थी। एनजीटी ने अपने फैसले में कंपनी को दोषी मानते हुए पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने का फैसला सुनाया है।