गढ़वाल मंडल की 1780 बस्तियां आज भी पानी से महरूम है। इन बस्तियों में रहने वालेे हजारों परिवारों को प्यास बुझाने के लिए जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड बनने की शुरुआत से ही हर गांव एवं बस्ती को पेयजल सुविधा से जोड़ने पर काफी जोर दिया जा रहा है। जिला, राज्य समेत सभी योजनाओं में पेयजल योजनाओं के निर्माण को काफी प्राथमिकता दी जा रही है। इसके बावजूद भी पौड़ी जनपद के खातस्यूं पट्टी में पड़ने वाले भैस्वाड़ा समेत कई गांवों में पानी की समस्या अपनी जगह बरकरार बनी है। इन गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए पेयजल योजनाओं का निर्माण नहीं हो पाया है। भैस्वाड़ा गांव में रह रहे लोग अभी भी गांव से एक किलोमीटर दूर हैंडपंप से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं। जल महकमे के अनुसार, गढ़वाल मंडल में 20462 बस्तियों में से मात्र 6745 बस्तियां ही पूर्ण रूप से पेयजल सुविधा से आच्छादित हैं। 11701 बस्तियां पानी की सुविधा से आंशिक रुप से आच्छादित हैं। इनमें बस्तियों में अभी कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया है। 1780 बस्तियां ऐसी है जिनमें पेयजल सुविधा नहीं है।
इन बस्तियों में रह रहे हजारों परिवार पानी के लिए पूरी तरह जल स्रोतों पर निर्भर हैं। इनमें रह रहे परिवारों को पेयजल सुविधा से जोड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं हो पाए हैं। हालांकि शासन की ओर से इन्हें शून्य से पच्चीस फीसदी तक पेयजल सुविधा से आच्छादित बस्तियों की सूची में दिखाया गया है।
पौड़ी जनपद में है सबसे ज्यादा जल संकट
पौड़ी। गढ़वाल मंडल में पौड़ी जिला सबसे ज्यादा जल संकट से जूझ रहा है। पौड़ी जिले में सर्वाधिक 840 बस्तियों पेयजल सुविधा से पूरी तरह वंचित है। इसके अलावा चमोली जनपद में 309, देहरादून में एक, हरिद्वार में चार, रुद्रप्रयाग में दो टिहरी में 597, उत्तरकाशी में 27 बस्तियों में पानी की सुविधा नहीं है। पेयजल सुविधा आंशिक रूप से जुड़ी बस्तियों में 2416 बस्तियां पौड़ी में, 1019 चमोली में, 1561 देहरादून में, 315 हरिद्वार में, 984 रुद्रप्रयाग में, 4231 टिहरी में, 1135 बस्तियां उत्तरकाशी में हैं।
कोट
भारत सरकार की ओर से निर्धारित नए मानकों के अनुसार मंडल में जो बस्तियां पेयजल सुविधा वंचित हैं। उन्हें शून्य से पच्चीस प्रतिशत तक की पेयजल सुविधा से आच्छादित बस्तियों की श्रेणी में रखा गया है। पेयजल सुविधा से पूरी तरह व आंशिक रूप से वंचित बस्तियों तक पानी पहुंचाने के लिए कवायद हो रही है। इसके लिए हर साल निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य किया जा रहा है। इन बस्तियों की संख्या भी समय-समय पर बदल रही है।
- आरके जोशी मुख्य अभियंता जल निगम, गढ़वाल मंडल पौड़ी