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अल्मोड़ा जेल में बंद मास्टर माइंड रुपेश त्यागी को रिमांड पर लेने की तैयारी में जुटी एसआईटी

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कोटद्वार। कोटद्वार के बहुचर्चित वकील सुशील रघुवंशी हत्याकांड के खुलासे के बाद अब एसआईटी ने अल्मोड़ा जेल में बंद शातिर अपराधी रूपेश त्यागी को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी शुरू कर दी है। एसआईटी और पौड़ी पुलिस की नजर में रूपेश त्यागी ही वकील सुशील रघुवंशी हत्याकांड का मास्टर माइंड है। पुलिस जहां एक ओर रूपेश की रिमांड की तैयारी में जुट गई है, वहीं हत्या को अंजाम देने वाले शार्प शूटरों और हत्याकांड में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास तेज कर दिए हैं।
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वकील सुशील रघुवंशी हत्याकांड का खुलासा करने के लिए गठित एसआईटी ने गत रविवार को दो प्रापर्टी डीलरों विनोद लाला, सर्वेश्वर उर्फ डब्बू के साथ ही सुमित पटवाल हत्याकांड के मास्टर माइंड सुरेंद्र सिंह नेगी उर्फ सूरी को गिरफ्तार कर पौड़ी जेल भेज दिया है। अब एसआईटी का फोकस अल्मोड़ा जेल में बंद इस हत्याकांड के मास्टर माइंड रूपेश त्यागी पर है। एसआईटी में शामिल कोटद्वार के इंस्पेक्टर मनोज रतूड़ी की टीम उसे पुलिस रिमांड पर लेने के लिए एक दो दिन के भीतर स्थानीय न्यायालय में प्रार्थनापत्र दाखिल करेगी। पुलिस का मानना है कि रूपेश त्यागी से पूछताछ के बाद उसके हाथ अहम सुराग लग सकते हैं। सबसे पहले शूटरों के बारे में और अधिक जानकारी हासिल की जाएगी। हत्याकांड में प्रयुक्त पिस्टल और मोटरसाइकिल की बरामदगी भी रूपेश के पुलिस रिमांड मिलने पर संभव हो सकेगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार शूटरों की पहले ही पहचान कर ली गई है। अब उनकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित की गई हैं। पूर्व में भी कोटद्वार सीआईयू टीम शूटरों की तलाश में यूपी, बिहार और झारखंड खंगालकर लौट चुकी है। इसमें पुलिस टीम के आने की भनक लगते ही शूटर अपने ठिकाने छोड़कर भाग गए थे। इस बार एसआईटी शूटरों की गिरफ्तारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

पूर्व की विवेचनाओं में रही खामियां, अन्यथा सलाखों के पीछे होते हत्यारे
कोटद्वार। हाईप्रोफाइल रहे सुशील रघुवंशी हत्याकांड का जहां पौड़ी पुलिस सोलह माह बाद भी खुलासा नहीं कर पाई थी, वहीं हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी ने इसे चार महीने में ही खोल दिया। इससे इस हत्याकांड की जांच कर रहे जिले के पूर्व विवेचना अधिकारियों पर सवाल उठने लाजिमी हैं। मृतक की पत्नी रेखा रघुवंशी का कहना है कि वह इस बात को कई मंचों पर उठा चुकी हैं। जब पुलिस अधिकारियों ने उनकी नहीं सुनी तो अंत में उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। पौड़ी के एसएसपी दिलीप सिंह कुंवर भी पूर्व की विवेचनाओं में खामियों की बात स्वीकार कर चुके हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पूर्व की विवेचनाओं में यदि खामियां नहीं रहतीं तो हत्यारे और हत्याकांड की साजिश रचने वाले कब के सलाखों के पीछे हो चुके होते।
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