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मेरा बाजु रंगा रंग बिचरी रंगा लेदी मोला...

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कोटद्वार। गढ़वाल सभा सहित विभिन्न संगठनों ने होली मिलन कार्यक्रम आयोजित कर होली का पर्व हर्षोल्लास से मनाया। होलिकोत्सव पर कहीं गढ़वाली खड़ी, कुमाउंनी बैठकी होली की धूम रही। तो कहीं डीजे पर बज रहे होली के गीतों पर युवा जमकर थिरके। विभिन्न क्षेत्रों में होल्यारों ने अबीर-गुलाल के साथ एक से बढ़कर एक पारंपरिक होली गीतों की प्रस्तुति पर ठुमके लगाकर होली की सतरंगी छटा बिखेरी।
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बुधवार को लालपुर स्थित एक बारातघर में गढ़वाल सभा की ओर से होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। जिसमें शहर के लोगों ने अबीर-गुलाल लगाकर एक दूसरे केे बधाई दी। इस अवसर पर लोक कलाकार महासंघ और मनसा लोक कला मंच ने गायक और रंगकर्मियों ने एक से बढ़कर एक होली और गढ़वाली गीतों की प्रस्तुति देकर समा बांधा। उन्होंने खड़ी होली में हरी हरी पीपल पात, जै अंबे मात भवानी.., खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर..., कृष्ण ने ब्रज में होली रचाई.., मत मारो मोहन लाला पिचकारी.., मेरा बाजु रंगा रंग बिचरी, रंग लेदी मोला.., आदि गीतों की प्रस्तुति दी। जिसपर दोपहर तक लोग थिरकते रहे।
इस अवसर पर गढ़वाल सभा के अध्यक्ष योगंबर सिंह रावत, गोविंद डंडरियाल, सत्यप्रकाश थपलियाल, ओमप्रकाश कबटियाल, राकेश मोहन ध्यानी, विनोद कुकरेती, पूर्व डीआईजी बलराम सिंह नेगी, विकास देवरानी, राकेश नैथानी, शशिभूषण अमोली, सुदीप बौंठियाल, नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष शशि नैनवाल, रेणुका गुसाईं, सुधा सती, मीनू खान आदि मौजूद थे।
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झंडाचौक पर महिलाओं ने की होलिका की पूजा
कोटद्वार। कोटद्वार के झंडाचौक पर शहर की मुख्य होलिका सजाई गई। बुधवार सुबह से ही महिलाएं होलिका दहन स्थल की पूजा करने के लिए पहुंची और उन्होंने दिया जलाते हुए होलिका पर सूत का धागा बांधा, गोबर के उपलों की माला, रोली, चावल, पुष्प, जौ की बालियां, हल्दी, गन्ने के पौधे आदि से होलिका की पूजा अर्चना की। मान्यता है कि होलिका पूजन से घर में सुख समृद्धि आती है। महिलाएं कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन से सात बार परिक्रमा करते हुए धागा लपेटती हैं। लोटे का पानी और अन्य सामग्री चढ़ाती है। होलिका पूजन के लिए दिन भर महिलओं की भीड़ लगी रही।
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