कोटद्वार। पौड़ी जिले के चार ब्लाकों के सैकड़ों गांवों को पेयजल आपूर्ति करने वाली 19 पेयजल योजनाएं सूखने की कगार पर हैं। योजनाओं को संचालित करने की जिम्मेदारी संभाले हुए जलसंस्थान शासन से योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बजट देने का प्रस्ताव भेज रहा है, लेकिन शासन बजट के मामले में लापरवाह बना हुआ है। ऐसे में इन योजनाओं की समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो इस बार गर्मियों में पर्वतीय क्षेत्रों में पानी का संकट हो जाएगा।
दुगड्डा, द्वारीखाल, नैनीडांडा और एमकेश्वर ब्लाक में अधिकतर पेयजल योजनाएं प्राकृतिक जल स्रोतों और गदेरों के पानी से संचालित होती हैं। ऐसे में स्रोतों की मरम्मत, पाइप लाइनों की मेंटीनेंस, पंपों की मरम्मत आदि के लिए विभाग को धन की आवश्यकता होती है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक सात ब्लाकों की 19 पेयजल योजनाओं में से 14 पेयजल योजनाएं सूखने की कगार पर हैं और पांच पेयजल योजनाएं पाइप लाइन और पंप की खराबी के चलते सूखने की कगार में हैं, लेकिन बजट नहीं आने पर विभाग योजनाओं पर काम नहीं कर पा रहा है। इसके चलते पानी की कमी होने के कारण पेयजल उपभोक्ताओं को जल संकट से जूझना पड़ रहा है।
ये योजनाएं हैं सूखने की कगार पर
नैनीडांडा पेयजल योजना, भैड़गांव, हल्दूखाल, परिंदा, दिऊला, बिथ्याणी, पोखरी घियाल गांव, बनास तल्ला, तिमली अकरा, दमराड़ा, गूम, द्वारीखाल, दाबड़, बूंगा तल्ला, चुंडई, रिगड्डी पंपिंग पेयजल योजना, सिगड्डी पंपिंग योजना, सनेह, हल्दूखाठता, कोटद्वार नगरीय पेयजल योजना सूखने की कगार पर हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
यह बात सही है कि बजट के अभाव में योजनाओं पर कार्य नहीं हो पा रहा है। जलसंस्थान कोटद्वार कार्यालय की ओर से शासन को करीब 37 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा हुआ है। बजट आते ही योजनाओं पर कार्य कर गर्मियों में लोगों को पर्याप्त पेयजल पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
-एलसी रमोला, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान कोटद्वार