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तुम भी आवा, मी भि औलू, छांटू ना ह्वावा..

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कोटद्वार। धाद लोकभाषा एकांश की ओर से आयोजित गढ़वाली कुमाऊंनी कवि सम्मेलन में कविताओं और गजलों की धूम रही।
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रविवार को बदरीनाथ रोड स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम का बतौर मुख्य अतिथि बलूनी क्लासेज की डायरेक्टर अभिलाषा भारद्वाज, नगर पालिका अध्यक्ष रश्मि राणा और सर्वोदयी सेवक मान सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बलूनी पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। एसकेडी एकेडमी के छात्रों ने स्वागत गीत की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ लोक गायक विजय सैलानी की गजलों से किया गया। सैलानी ने मधुसूदन थपलियाल की रचना तुम भी आवा, मी भि औलू, छांटू ना ह्वावा.., लोकेश नवानी की रचना जब तौं धार मां, ऐली जन्याली ए भुला.., राकेश मोहन ध्यानी की रचना लागी त्वे अपणी लगौलू ए भि जा... आदि गजलों की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उसके बाद कवि हेमवती नंदन भट्ट ने ऐंसु का बग्वाल डेरा मां मनौलू.. आदि कविताओं से पहाड़ की विरासत से श्रोताओं को रू-ब-रू कराया। इसके बाद मधुसूदन थपलियाल, महेंद्र नीलकंठ, शांति प्रकाश जिज्ञासू, नीता कुकरेती, बीना कंडारी, दिनेश ध्यानी, सतेंद्र चौहान, नरेंद्र रयाल, रमेश हितेषी, बीना कंडारी और राजेंद्र धस्माना ने एक से बढ़कर एक कविताएं प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
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इस अवसर पर धाद की ओर से बलूनी क्लासेज की डायरेक्टर अभिलाषा भारद्वाज, नगर पालिका अध्यक्ष रश्मि राणा, व्यापारी राजेश खुगशाल, शिक्षिका बबीता ध्यानी को प्रशस्ति सम्मान से सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम में चित्रकार हरीश ध्यानी, राकेश केष्टवाल और चंद्रिका तिवारी की गढ़वाली कविता पोस्टर प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर संस्था के संरक्षक कर्नल (सेनि.) बीवी ध्यानी, जगदंबा प्रसाद कोटनाला, अनुसूया प्रसाद डंगवाल, विमल ध्यानी, अध्यक्ष जगमोहन सिंह बिष्ट, सचिव राकेश मोहन ध्यानी, उपाध्यक्ष सोहन लाल मैंदोला, सुंदर लाल जोशी, सहसचिव रिद्धि भट्ट, अंबिका प्रसाद ध्यानी व शशिभूषण अमोली आदि मौजूद थे।
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