कोटद्वार। नजीबाबाद-बुआखाल राष्ट्रीय मार्ग स्थित सुखरो पुल की सुरक्षा रेत के कट्टों के भरोसे की जा रही है। पिछले दो साल से सुखरो नदी पुल के पास भू-कटाव कर रही है। नदी के कटाव से सुखरो पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे वाहनों की आवाजाही पर भी खतरा बना हुआ है, लेकिन एनएच विभाग की कार्रवाई रेत के कट्टों तक सिमट कर रह गई है।
विगत 22 जुलाई 2016 को नजीबाबाद-कोटद्वार रेल ट्रैक पर सुखरो नदी में बने पुल का एक पिलर नदी के तेज बहाव में ढह गया था। साथ ही नजीबाबाद-बुआखाल एनएच पर सुखरो नदी में बने मोटर पुल और सड़क का भी कुछ हिस्सा ढह गया था। तब कटाव को देखते हुए एनएच के अधिकारियों ने सुखरो पुल और सड़क की सुरक्षा के लिए उसके किनारे रेत से भरे कट्टे लगाए थे, लेकिन विभाग ने पुल के पास सड़क पर सुरक्षा दीवार बनाने की जहमत नहीं उठाई। एनएच की ओर से पूर्व में लगाए रेत के कट्टे भी सुखरो नदी के उफान में बह गए हैं। एनएच ने पुल की ओर मार्ग की सुरक्षा के लिए फिर से रेत के कट्टे लगाए हैं। नदी के कटाव ने पुल के दोनों ओर के पिलरों की जड़ को खोखला करना शुरू कर दिया है। इससे पुल को खतरा बना हुआ है। एनएच पुल के दोनों छोरों पर लाल झंडी लगाकर खानापूर्ति तक सीमित है।
उधर, राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डीके चतुर्वेदी ने बताया कि बरसात के बाद सड़क की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान किए जाएंगे।
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