फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन वर्ष से चार नहरों की नहीं हुई मरम्मत, किसानों के खेत पड़े बंजर

विज्ञापन
विज्ञापन
यमकेश्वर। केंद्र और प्रदेश सरकार की खेती को बढ़ावा देने की महत्वाकांक्षी योजना को सिंचाई विभाग यमकेश्वर पलीता लगा रहा है। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि यमकेश्वर ब्लाक की चार मुख्य सिंचाई नहरें चार साल से पूर्ण रूप से बंद हैं। सिंचाई के अभाव में किसानों के उपजाऊ खेत बंजर पड़े हुए हैं।
विज्ञापन

वर्ष 2014 की अगस्त में यमकेश्वर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण आपदा आई थी। इसमें ब्लाक की 29 सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। विभाग ने इनमें से 25 नहरों को किसी तरह से चालू कर दिया, लेकिन अभी तक ठिठोल, जोग्याणा, आमसैंण, डाबर गांव की सिंचाई नहरें ठप पड़ी हुई हैं। इसके कारण सैकड़ों ग्रामीणों के खेत बंजर पड़े हैं। इसमें लैंटाना की झाड़ियां तक उग आई हैं। जिम्मेदार विभाग बजट का अभाव बताकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है। इसके कारण लोगों में विभाग के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
किसान महेंद्र कुमार, रविंद्र नेगी, रामेश्वर प्रसाद केष्टवाल, नरेंद्र सिंह रावत ने सिंचाई विभाग पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि नहरों की स्थित को लेकर लगातार लिखित और मौखिक शिकायत की जाती है। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से बीडीसी बैठकों में नहरों के क्षतिग्रस्त का मामला उठाया जा रहा है, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं हो रही है। खेत में पानी नहीं आने के कारण लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है खेत पर लैंटाना झाड़ी जमने लगी है, जिससे जंगली जानवरों का खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन

उधर, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सुबोध मैठाणी ने बताया कि विभाग के पास जितना बजट था, उसको क्षतिग्रस्त नहरों के निर्माण में लगा दिया है। वर्तमान में चार नहरों पर कार्य होनेे शेष रह गया है। बजट आने पर नहरों की मरम्मत की जाएगी।
विज्ञापन

-फोटो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें