उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं पर काम कर रही कंपनियां प्रदेश के मुखिया के आदेशों को नहीं मानती हैं। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के लिए मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनी एएचपीएस (अलकनंदा हाईड्रो पावर सर्विसेज) ने मुख्यमंत्री हरीश रावत की मनाही के बावजूद बृहस्पतिवार को 211 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करते हुए उनके बैंक खातों में अंतिम भुगतान (फुल एंड फाइनल सेटलमेंट) कर दिया है।
मालूम हो कि विगत 16 दिसंबर को एएचपीएस ने कर्मचारियों को 14 जनवरी तक (एक माह) का वक्त देते हुए सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया था। कंपनी का कहना था कि परियोजना संचालन कर रही कंपनी एएचपीसीएल के साथ कांट्रेक्ट समाप्त हो गया है। लिहाजा उनको आगे रोजगार नहीं दिया जा सकता है। कंपनी के इस निर्णय की जद में 211 कर्मचारी आ रहे हैं।
विरोधस्वरुप कर्मचारी 21 दिसंबर से आंदोलन चला रहे हैं। 11 जनवरी को कीर्तिनगर में शहीदी मेले में आए मुख्यमंत्री हरीश रावत के समक्ष भी कर्मचारियों ने अपनी समस्या रखी। जिस पर मुख्यमंत्री ने अग्रिम आदेशों तक उनको रोजगार में बनाए रखने के आदेश दिए थे।
मुख्यमंत्री के आदेश के अनुपालन में 13 जनवरी को डीएम टिहरी ज्योति खैरवाल ने एएचपीसीएल को निर्देशित किया था कि परियोजना में लगे 211 कर्मचारियों को अग्रिम आदेशों तक कार्य में बनाए रखने के लिए कहा था। इसके बावजूद एएचपीएस ने कांट्रेक्ट समाप्त कर दिया।
कंपनी पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप
श्रीनगर। एएचपीएस की ओर से अनुबंध खत्म करने से आंदोलनरत कर्मचारी भड़क गए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी ने मुख्यमंत्री के निर्देशों की अवहेलना की है।
धरनास्थल कोटेश्वर में आयोजित सभा में एएचपीएस संगठन के अध्यक्ष सतेंद्र बत्र्वाल ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति की दुसरी बैठक 12 जनवरी को डीएम टिहरी की मध्यस्थता में होनी थी। लेकिन कंपनी के अधिकारी बैठक में नहीं गए। अब मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को यथावत रखने के निर्देश दिए, तो कंपनी ने उसे भी नहीं माना। वहीं, बृहस्पतिवार को राजेंद्र भंडारी, प्रेमराम, रंजन, पंकज बिष्ट व अनूप सिंह क्रमिक अनशन पर बैठे।