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व्यावसायिक वाहन ही कर सकेंगे रेत, बजरी का परिवहन

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कोटद्वार। क्षेत्र की प्रमुख मालन नदी में गत 13 जनवरी से खुले खनन, चुगान से जहां निर्माण एजेंसियों को राहत मिली है, वहीं अवैध खनन भी थमने लगा है। छह दिन में मालन नदी से वन निगम को करीब ढाई लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वन निगम ने रेत, बजरी ढोने के लिए केवल उन्हीं वाहनों को अधिकृत किया है, जिनका रजिस्ट्रेशन कामर्शियल वाहनों के रूप में मौजूद है।
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वन निगम के प्रभागीय विक्रय प्रबंधक राजेंद्र चौधरी ने बताया कि वन क्षेत्र में पड़ने वाली मालन नदी में गत वर्ष 22 मार्च को 13 साल बाद खनन, चुगान की अनुमति केंद्र सरकार से मिली थी। गत 31 मई को मानसून सत्र के लिए खनन बंद कर दिया गया था। 12 जनवरी को शासन की ओर से अनुमति और ई-रवन्ना जारी होने के बाद खनन, चुगान शुरू कर दिया गया है।
निगम के अनुभाग अधिकारी मुलायम सिंह बिष्ट ने बताया कि 13 जनवरी से हर रोज करीब 50 ट्रैक्टर ट्राली और डंपर रेत और बजरी के लिए पहुंच रहे हैं। विभाग के पास पंजीकृत कामर्शियल वाहनों को ही उपखनिज के परिवहन की अनुमति दी जा रही है। खनन, चुगान के मानकों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। 13 से 18 जनवरी तक छह दिन में करीब ढाई लाख रुपये का राजस्व मिला है। मालन से 17.72 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से रेत बजरी बेची जा रही है। इसमें पांच फीसदी जीएसटी और 47.50 रुपये वाहन की तुलाई के अलग से चार्ज किया जा रहा है।
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