कोटद्वार। पनियाली डायवर्जन विरोध समिति के बैनर तले मंगलवार को सुखरो पट्टी के 11 गांवों के ग्रामीणों ने देवी मंदिर से तहसील मुख्यालय तक जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पनियाली नाले को सुखरो नदी में मिलाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे। उन्होंने अपनी एक सूत्री मांग को लेकर मुख्यमंत्री और वन मंत्री को ज्ञापन भी भेजा।
मंगलवार को सुखरो पट्टी के मानपुर, शिवपुर, सिताबपुर, लालपुर, ध्रुवपुर, पदमपुर, बालासौड़, शिब्बूनगर, बलभद्रपुर, सिंबलचौड़ गांव के ग्रामीण देवी मंदिर में एकत्र हुए। यहां से उन्होंने पनियाली नाले को सुखरो नदी में मिलाने की डायवर्जन योजना के विरोध में नगर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। जुलूस देवी रोड, लालबत्ती चौराहा, झंडाचौक व बद्रीनाथ मार्ग होते हुए तहसील मुख्यालय पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। सभा में समिति के अध्यक्ष सीपी नैथानी ने कहा कि वर्ष 2017 की आपदा के बाद 130 अतिक्रमणों को चिह्नित कर उनकी सूची प्रशासन को भेजी गई है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पनियाली गदेरे का अतिक्रमण हटाकर इसे चौड़ा कर दिया जाएगा तो डायवर्जन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। नैथानी ने कहा कि डायवर्जन योजना प्रकृति के विपरीत प्रस्तावित की गई है। इससे बरसात में 11 गांवों की हजारों की आबादी प्रभावित होगी।
सभा के बाद प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में पनियाली नाले के डायवर्जन के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और 1960 के बंदोबस्त की पैमाइश के अनुसार चिह्नित और गैर चिह्नित अतिक्रमणों को हटाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों में समिति के महामंत्री डबल सिंह रावत, कोषाध्यक्ष गोविंद डंडरियाल, पूर्व राज्यमंत्री सुनीता बिष्ट, राजेंद्र अणथ्वाल, लूथी सिंह बिष्ट, देवेंद्र सिंह रावत, मनवर सिंह बिष्ट, शांति देवी, प्रीति सिंह, सती देवी, मंजू रावत व बलवीर सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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