कोटद्वार। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से ड्रामा इन एजूकेशन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें 35 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में शिक्षकों ने ड्रामा की तकनीकियों और नाट्य विधा से बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के गुर सीखें।
कार्यशाला में फाउंडेशन के मुख्य संदर्भ व्यक्ति गणेश बलूनी ने कहा कि वर्तमान में नाट्य विधा को शिक्षण विधा के रूप में अपनाने की आवश्यकता है। हर एक बच्चे में सीखने की क्षमता होती है। नाट्य विधा से बच्चों का स्वाभाविक विकास हो सकता है। साथ ही बच्चों को सीखने में आसानी होती है। शिक्षक नाट्य विधा से बच्चों को अपनी बातें आसानी से समझा सकते हैं। साथ ही नाट्य विधा से बच्चों को अपनी दिनचर्या के अच्छे शिष्टाचार को अपनाने का संदेश भी दिया जा सकता है। फाउंडेशन के समन्वयक संजय नौटियाल ने कहा कि शिक्षकों को अवकाश के दिनों में भी स्वैच्छिक रूप से कार्यशाला में प्रतिभाग करना शुभ संकेत है। इस अवसर पर राजीव थपलियाल, मोहन सिंह गुसाईं, संगीता उनियाल, अलका बिष्ट, लक्ष्मी नैथानी, शिल्पी नेगी, मीना भंडारी, विपिन बडोला, पंकज शुक्ला, अनिल कोटनाला, रघुनाथ गुसाईं, वेद प्रकाश खर्कवाल आदि मौजूद रहे।