कोटद्वार। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल महाभियान के तहत कोटद्वार के कैम्स इंस्टीट्यूट में हैंडीक्राफ्ट फैशन शो का आयोजन किया गया। संस्थान की छात्राओं ने वेस्ट मैटीरियल से ड्रेस बनाईं और उन्हीं को पहनकर रैंप पर कैटवॉक कर महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया।
मानपुर स्थित कैम्स संस्थान में आयोजित फैशन शो का संस्थान के एमडी अजेंद्र राणा ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं देश में शीर्ष पदों पर कार्य करते हुए देश की तरक्की में सहायक बन रही हैं। खासकर फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी मेहनत और हुनर से पूरे विश्व में नाम कमाया है। यही कारण है कि अब छात्राएं फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र को करियर के रूप में चुन रही हैं। उन्होंने अमर उजाला के अपराजिता महाभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे महिलाओं में नई ऊर्जा के संचार के साथ उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेेगी। इस दौरान आयोजित फैशन शो में संस्थान की फैशन डिजाइनिंग कोर्स की छात्रा ज्योति चौहान, किरन नेेगी, मोनिका, नेहा रावत, निकिता भंडारी, आरुषि जदली, निकिता रावत, मीनाक्षी जदली, काजल जुयाल, हिमानी चौधरी, अलीशा अंसारी और सोनिया बिष्ट ने वेस्ट मैटीरियल से ड्रेस तैयार किए। उन्होंने सीडी, स्ट्रो पाइप, चार्ट पेपर, पुराना कपड़ा आदि वस्तुओं से आकर्षक ड्रेस बनाईं। उन्होंने ड्रेस पहनकर रैंप पर कैटवॉक किया और महिलाओं को बेकार पड़ी वस्तुओं का उपयोग कर उनसे भी स्वरोजगार शुरू करने के साथ ही कामयाबी पाने का संदेश दिया। इस अवसर पर संस्थान की फैशन डिजाइनिंग की विभागाध्यक्ष अर्चना पयाल, याशिका भदूला, वंदना, अंजू कुंवर आदि ने सहयोग दिया।
महिला सशक्तिकरण पर बोलीं छात्राएं:
अमर उजाला का अपराजिता महाभियान एक सराहनीय प्रयास है। महिलाओं को उनके पूरे अधिकार देनें होंगे। उनको भी अपने अधिकारों को लेकर जागरूक होने की जरूरत है, तभी जाकर वे स्वावलंबी बन सकती हैं। - ज्योति चौहान।
समय बदल रहा है, महिलाएं अब घर आंगन और रसोई तक सीमित नहीं हैं। महिलाओं को सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलना चाहिए, तभी सही मायने में महिला सशक्तिकरण की कल्पना की जा सकती है। - अलीशा अंसारी।
बेटियों को बोझ नहीं समझना चाहिए। उसे अगर सही शिक्षा और मार्गदर्शन मिले को हर असंभव कार्य को भी संभव बना सकती है। बेटियां बेटों से किसी भी कार्य में कमतर नहीं हैं। - किरन नेगी।
समाज में फैली विकृतियों के चलते आज भी महिलाएं अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। जब तक महिलाओं को पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती तब तक महिला सशक्तिकरण की बात करना बेकार है। - आरुषि जदली।