लैंसडौन। छावनी परिषद की ओर से दुकानदारों को जारी बेदखली के आदेश को जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत के आदेश से प्रभावित दुकानदारों ने चैन की सांस ली है।
कैंट बोर्ड ने अपने स्वामित्व वाली 44 दुकानों के 29 आवंटन धारकों को सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम पर अवैध कब्जा मानते हुए इन दुकानों को खाली कराने के लिए 26 फरवरी को आदेश दिए थे। पीड़ित दुकानदारों ने इस आदेश के खिलाफ जिला जज एवं सत्र न्यायालय पौड़ी में प्रार्थनापत्र दाखिल कर चुनौती दी थी। अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में रक्षा संपदा अधिकारी/मुख्य अधिशासी अधिकारी द्वारा दिए गए बेदखली के आदेश को खारिज कर दिया है। अदालत के इस निर्णय से प्रभावित दुकानदारों को राहत मिली है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता पवन बंसल ने बताया कि अदालत ने बचाव पक्ष की इस अपील को माना कि रक्षा संपदा अधिकारी/मुख्य अधिशासी अधिकारी ने इस मामले में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है।
कैंट की उपाध्यक्ष इंद्रा रावत ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूर्व में बोर्ड के सभी निर्वाचित सदस्यों ने इन दुकानों की नीलामी का विरोध किया था। व्यापारी खेमचंद बौंठियाल ने कहा कि दुकानों की बेदखली से वर्षों से आजीविका चला रहे दुकानदारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा होने के आसार बन गए थे।