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चुनौतियों का सामना करके ही अपराजिता बनेंगी बेटियां

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कोटद्वार। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत एसडीकेडी एजुकेशनल एकेडमी पदमपुर सुखरो में आयोजित गोष्ठी में छात्राओं और अभिभावकों को बाल अपराध एवं महिला हिंसा के प्रति जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि छात्राएं जीवन की चुनौतियों से घबराएं नहीं, बल्कि उनका डटकर मुकाबला करें। बेटियां समाज की चुनौतियों को पार करके ही अपराजिता बन सकती हैं। इसके लिए बेटियों का जागरूक और शिक्षित होना जरूरी है।
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शनिवार को एसडीकेडी एजुकेशनल एकेडमी पदमपुर सुखरो में बाल अपराध एवं महिला हिंसा से जागरूकता पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक विमल ध्यानी ने कहा कि बेटियां परेशानियों से भागे नहीं, बल्कि उनका डटकर मुकाबला करें। लड़कियां दुनियाभर में लगन और परिश्रम से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। देश के कई उच्च पदों पर बेटियां आसीन हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बेटा और बेटी में फर्क छोड़कर बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने और समाज की चुनौतियों को पार करने में सहयोग करना चाहिए।
विद्यालय की प्रधानाचार्य सुमन मैंदोला ने कहा कि बेटियां ईश्वर का वरदान हैं। उनसे घर मेें खुशहाली आती है, लेकिन, समाज में बढ़ रहे बाल अपराध और महिला हिंसा के मामले चिंता का विषय बने हैं। उन्होंने छात्राओं को गुड टच और बैड टच के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। कहा कि यदि छात्राओं के साथ कहीं भी ऐसी घटनाएं होती हैं तो वे तुरंत अपने अभिभावक और शिक्षक को जरूर बताएं। इस दौरान सभी छात्राओं और अभिभावकों को कोटद्वार थाने का 01382-222006, 9411112850 और सीओ कार्यालय का सीयूजी नंबर 9411112735 नोट कराया गया। छात्राओं को महिला हेल्पलाइन 1090 और एकल इमरजेंसी नंबर 112 की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई।
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छात्राओं, शिक्षिकाओं और अभिभावकों ने भरे शपथ पत्र
कोटद्वार। एसडीकेडी एजुकेशनल एकेडमी में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं, शिक्षिकाओं और अभिभावकों ने नारी गरिमा को बढ़ाने के संकल्प के साथ शपथ पत्र भरे। उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने और महिला अपराध के विरुद्ध चुप्पी तोड़ने का संकल्प लिया। कहा कि यदि उनके आसपास कोई भी बेटी महिला हिंसा का शिकार होगी तो वह इसकी सूचना तुरंत पुलिस को देंगी। इस दौरान शिक्षिका रेणु ध्यानी, जयंती, मीना खंतवाल, मीनाक्षी बड़थ्वाल, पूनम नेगी, सुमित्रा चंद, साधना गोदियाल, इंदू बिष्ट व सोनिका रावत समेत 133 प्रतिभागी मौजूद रहे।
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अपराजिता कार्यक्रम से बेटियों को हिम्मत और कानून की जानकारी मिल रही है। यह बाल अपराध और महिला हिंसा जैसे अपराध को रोकने की अच्छी पहल साबित होगी।
- उषा रावत, अभिभावक।

अभिभावकों को बेटा और बेटी को समान शिक्षा देनी चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि बेटियां भी माता-पिता का नाम रोशन कर सकती हैं।
- सीमा देवी, अभिभावक।

अभिभावकों को बेटियों को डरना नहीं, बल्कि विरोध करना सिखाना चाहिए। उनको बाल अपराध एवं महिला हिंसा जैसे मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है।
- गीतांजलि रावत, अभिभावक।

-फोटो
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