कण्वघाटी (कोटद्वार)। चिलरखाल-लालढांग मोटर मार्ग समेत वन विभाग के शिवालिक वृत के तहत वन मोटर मार्गों पर वाहनों का संचालन अब मंहगा हो गया है। वन विभाग ने इन मार्गों के रखरखाव के नाम पर वाहनों के संचालन के लिए शुल्क की दरें बढ़ा दी हैं। वन संरक्षक का आदेश मिलते ही लैंसडौन वन प्रभाग में भी ये नई दरें लागू हो गई हैं। वाहन स्वामियों से अब वन मार्ग पर वाहन दौड़ाने के लिए पहले से कई गुना अधिक शुल्क वसूला जाने लगा है। वन विभाग द्वारा शुल्क बढ़ोत्तरी के आदेश से स्थानीय लोग भड़के हुए हैं। उन्होंने बढ़ाए गए शुल्क को वापस न लिए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दे डाली है।
वन विभाग के अभिलेखों में चिलरखाल-लालढांग 11 किमी मार्ग वन मोटर मार्ग के रूप में दर्ज है। इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक होती है। पूर्व में जहां इस मार्ग पर सार्वजनिक भारी वाहन से डेढ़ सौ रुपये लिए जाते थे, वहीं नए आदेश के बाद वन विभाग ने यह धनराशि दोगुनी करते हुए 300 रुपये प्रति फेरा कर दी है। वन उपज और खाद्य पदार्थ ढोने वाले ट्रकों से 50 रुपये के स्थान पर अब 130 रुपये प्रति फेरा लिए जा रहे हैं। प्राइवेट कार, मिनी बस, पिकअप से दस रुपये के स्थान पर शुल्क बढ़ाकर 50 रुपये प्रति फेरा कर दिया गया है। व्यावसायिक टैक्सी, कार, मिनी बस, पिकअप, टेंपो का शुल्क 40 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति फेरा कर दिया गया है। अब तक निशुल्क जाने वाले मोटर साइकिल, स्कूटर, स्कूटी समेत सभी दोपहिया वाहनों को भी अब 10 रुपये प्रति फेरा शुल्क देना होगा। ट्रैक्टर से 130 रुपये प्रति फेरा लिए जाएंगे। वन विभाग ने बुग्गी वालों को भी नहीं छोड़ा है। उनसे भी 50 रुपये प्रति फेरा शुल्क वसूला जा रहा है। इस शुल्क के साथ वाहन स्वामी अथवा चालकों को 18 प्रतिशत जीएसटी भी अतिरिक्त देना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय पार्षद जगदीश सिंह मेहरा, अमित नेगी, नवीन शर्मा, देवेंद्र सिंह राणा, राकेश चंद्र ध्यानी, वीरेंद्र सिंह पाल, प्रमोद बौंठियाल, गजेंद्र मेहरा, संजय भारद्वाज का कहना है वाहन शुल्क की दरों को बढ़ाने से स्थानीय नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है। शासन द्वारा शुल्क बढ़ोत्तरी के आदेश वापस न लिए जाने पर स्थानीय लोग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।