कोटद्वार/यमकेश्वर। दो दिन से लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र की बरसाती नदियां उफान पर बह रही हैं, इसके कारण कई क्षेत्रों में सोमवार सुबह स्कूली बच्चे स्कूल नहीं जा सके। कोटद्वार भाबर में उफान पर रहे तेलीस्रोत रपटे ने आरपार जाने के लिए लोगों को तीन घंटे का इंतजार करवाया। यमकेश्वर की रवासन नदी के उफान पर होने के कारण सीला समेत आसपास के गांवों के बच्चे स्कूल नहीं जा सके। क्षेत्रवासी लंबे समय से बरसाती नदियों में पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं।
रविवार सुबह से हो रही भारी बारिश का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। सोमवार को यमकेश्वर में स्थित रवासन नदी उफान पर रही। इसके चलते सोमवार को आंगनबाड़ी केंद्र सीला, प्राथमिक विद्यालय सीला और हाईस्कूल सीला में ठिगाबांज, दालमीसेरा, गाजसेरा, राजसेरा, सीला व फेडवा आदि गांवों से आने वाले बच्चे विद्यालय नहीं जा सके। रवासन नदी के दूसरी ओर स्थित काटल, हरसोली, तिमल्याणी, कचुण्डा व कांडई आदि गांवों के लोग सीला की ओर नहीं आ सके। सीला के ग्राम प्रधान आशीष रतूड़ी, क्षेत्र पंचायत सदस्य महावीर सिंह, अनिल कुमार, विरेंद्र सिंह व गिरीश बड़ोला का कहना है कि वर्ष 2014 में यमकेश्वर में आई आपदा से ग्राम सीला में बना मोटर पुल बह गया था। इसको वन विभाग अभी तक नहीं बना पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में नदी में पानी अधिक होने से बच्चे कई दिनों तक विद्यालय में नहीं जा पाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
उधर, भाबर के किशनपुर-सिगड्डी मार्ग पर पड़ने वाले तेेलीस्रोत गदेरे पर पुल का निर्माण न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को गदेरे के उफान पर रहने से सिगड्डी ग्रोथ सेंटर की फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारी और श्रमिकों को गदेरे का जलस्तर कम होने का सात बजे से दस बजे तक इंतजार करना पड़ा। रामदयालपुर निवासी विमल प्रसाद शुक्ला, विद्या दत्त केष्टवाल, कुंवर सिंह राणा, रमेश सिंह नेगी, भुवनेश केष्टवाल व दाताराम केष्टवाल का कहना है कि क्षेत्रवासी लंबे समय से तेलीस्रोत गदेरे में पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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