कोटद्वार। उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक आउटसोर्स मोर्चा के गढ़वाल प्रभारी हर्षमोहन सिंह नेगी ने सचिवालय के अधिकारियों पर गलत आंकड़े प्रस्तुत कर मुख्यमंत्री को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने दमनकारी नीति अपनाई तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
बद्रीनाथ मार्ग स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि गत तीन वर्षों से कर्मचारी शांतिपूर्ण ढंग से मांगों के निस्तारण के लिए प्रयास करते आ रहे हैं, लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने अंतिम कार्यकाल और सत्तासीन भाजपा सरकार ने अपने डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में कोई कार्रवाई नहीं की। कर्मचारियों ने मजदूर दिवस पर मोर्चा का गठन कर अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखीं। इस पर मुख्यमंत्री ने उनसे 45 दिन का समय मांगा था, लेकिन समयावधि गुजर जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनवरी 2016 से लागू बोनस व भत्ते अभी तक रुके हैं। सप्तम वेतनमान की विसंगतियों को भी सरकार दूर नहीं कर पा रही है। संविदा श्रमिकों को तो आठ से वेतन तक नहीं दिया गया है। पुरानी पेंशन को अविलंब लागू किया जाना चाहिए। 17 अगस्त को परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास तक आक्रोश रैली निकाली जाएगी। 23 से 25 अगस्त तक पूरे प्रदेश के कार्मिक, शिक्षक और आउटसोर्स कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे, जबकि 27 अगस्त से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा। इस मौके पर प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश मोहन तिवारी, मुख्य संयोजक नरेश सिंह, जेपी बहुखंडी, नरेश सिंह चौहान, हेमंत भारद्वाज, वीर सिंह घांघट, बृजमोहन गुसाईं व जीतेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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