कोटद्वार। जीएमवीएन की कौड़िया स्थित फ्लशडोर फैक्ट्री उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) के ड्रीम टूरिज्म प्रोजेक्ट नॉर्थ कार्बेट रिजॉर्ट में तब्दील हो गई है। करीब 14 करोड़ की लागत से निर्मित इस परियोजना के संचालन पर पर्यटन विभाग में असमंजस बना हुआ है। इसके कारण इस सीजन में भी इसका लाभ पर्यटकों को नहीं मिल पा रहा है, जबकि परियोजना एक साल पहले से बनकर तैयार है।
कार्बेट पार्क समेत कोटद्वार और लैंसडौन आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए यूटीडीबी ने एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहायता से कोटद्वार के कौड़िया में नार्थ कार्बेट रिजॉर्ट के नाम से अत्याधुनिक रिजॉर्ट का निर्माण किया है। इस परियोजना में करीब 14 करोड़ रुपये की लागत आई है। कोटद्वार में बनाए गए इस रिजॉर्ट का मकसद पर्यटकों को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ ही प्रकृति के भी नजदीक से दीदार कराना रहा है, लेकिन इस परियोजना का निर्माण के एक साल बाद भी लोकार्पण नहीं हो पाया है। हालांकि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की ओर से इस रिजॉर्ट के संचालन की जिम्मेदारी गढ़वाल मंडल विकास निगम को सौंपने की मांग की जा रही है।
जीएमवीएन ने 70 के दशक में कौड़िया की करीब दस एकड़ जमीन पर फ्लशडोर फैक्ट्री का निर्माण करवाया था। 1983 में इस फैक्ट्री में उत्पादन शुरू हुआ था। करीब तीन दशक यह फैक्ट्री खूब चली, लेकिन इसके बाद आर्डर न मिलने से फैक्ट्री घाटे पर जाती रही और आखिरकार 2008-09 में बंद कर दी गई। तब से यह परिसर खाली पड़ा था। राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने यहां पर एडीबी की मदद से 2014 में नार्थ कार्बेट पर्यटन प्रोजेक्ट का काम शुरू करवाया है, जो गत वर्ष पूरा हो चुका है।
क्या है नॉर्थ कार्बेट रिजॉर्ट
करीब 10 एकड़ जमीन में बने इस नॉर्थ कार्बेट रिजॉर्ट में पर्यटकों के लिए एक ही स्थान पर आवासीय, कैंटीन, सम्मेलन व मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। उत्तराखंड में सरकारी क्षेत्र में टूरिज्म गतिविधियों का यह पहला पर्यटन स्थल होगा, जिसकी तर्ज पर अन्य स्थानों पर भी इस तरह के कॉटेज का निर्माण प्रस्तावित है। इस रिजॉर्ट में सूचना एवं सुविधा केंद्र, पार्किंग की सुविधाएं तो मिलेंगी ही यहां आठ कॉटेज अत्याधुनिक सुविधायुक्त, इंटरप्रिटेशन सेंटर, कान्वेंशन सेंटर, म्यूजिकल फाउंटेन, एडवेंचर क्लाइबिंग वाल, ओपन एयर रेस्टोरेंट और खूबसूरत उद्यान का पर्यटक एक साथ लुत्फ उठाएंगे।
नॉर्थ कार्बेट रिजॉर्ट के संचालन के लिए एजेंसी शासन स्तर पर तय होगी। उच्चाधिकारी शासन स्तर पर पत्राचार कर रहे हैं।
-रामकुमार वर्मा, सहायक पर्यटन अधिकारी कोटद्वार।
-फोटो