सतपुली। नगर निकाय चुनाव के लिए अंतिम आरक्षण की अधिसूचना जारी होते ही सर्द मौसम में चुनावी पारा चढ़ने लगा है। आरक्षण पर अंतिम मुहर लगते ही सतपुली नगर पंचायत में अध्यक्ष बनने का मंसूबा पाले अनेक राजनीतिक सूरमाओं का गणित गड़बड़ा गया है।
सतपुली नगर पंचायत अध्यक्ष पद महिला आरक्षित होने से सत्तारूढ़ भाजपा एवं कांग्रेस से जुड़े अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं समेत इस पद पर काबिज होने का सपना संजोए कई पुरुष दावेदारों के मंसूबों पर पानी फिर गया है। इससे एक ओर दावेदारों एवं उनके समर्थकों में जहां घोर निराशा है, वहीं दूसरी ओर राजनीति का ककहरा भी न समझने वाली अनेक महिलाओं को अचानक चुनाव लड़ने का मौका मिलने से वे बहुत खुश हैं। अध्यक्ष पद महिला आरक्षित होने से इसे कब्जाने की जोड़-तोड़ में जुटे दावेदार अब पैंतरा बदलकर बैकडोर एंट्री की तलाश में हैं। मौके की नजाकत भांपते हुए आरक्षण की जद में आए कई दावेदारों ने पत्नियों और परिवार की महिलाओं को आगे कर इन पदों को अपनी जद से बाहर न जाने देने के लिए समीकरण बिठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं अचानक खुली महिला आरक्षण की लॉटरी से कई अनजान एवं राजनीतिक रूप से नौसिखिए चेहरे भी अध्यक्ष पद पर ताल ठोकने की तैयारी में हैं।
सतपुली में त्रिवेंद्र और महाराज की साख दांव पर
सतपुली। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज जैसे दिग्गजों के गृह क्षेत्र के एकमात्र निकाय होने के चलते सतपुली नगर पंचायत पर दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। वर्ष 1996 से 2002 तक सीएम त्रिवेंद्र रावत की भाभी कांति देवी सतपुली की ग्राम प्रधान रह चुकी हैं। वहीं, विपक्षी कांग्रेस खेमे ने भी दोनों दिग्गजों की घेराबंदी करते हुए वर्ष 2012 और 2017 में चौबट्टाखाल विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा चुके राजपाल बिष्ट और क्षेत्र के नेता सूर्यकांत धस्माना को नगर पंचायत चुनाव में पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपकर कांग्रेस का खेवनहार बनाया है।