कोटद्वार। सालभर पहले की आपदा में की गई घोषणाओं पर अमल न होने से गुस्साए प्रभावितों का गुस्सा पुलिस प्रशासन पर फूटा। कहा कि अगर सालभर पहले की आपदा से यदि एक भी सबक लिया होता तो लोगों को नुकसान नहीं झेलना पड़ता। उन्होंने देवीरोड से गुजर रही भूमिगत दाई खोह नहर को पूर्व की तरह खुला रखने की मांग की।
शनिवार को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को बाढ़ प्रभावितों का आक्रोश झेलना पड़ा। बाढ़ के बाद जैसे ही एएसपी डा. हरीश वर्मा और एसडीएम कमलेश मेहता अपने लाव लश्कर के साथ आपदा प्रभावित क्षेत्रों में गए तो जनता ने उन पर सवालों की बौछार कर दी। गुस्साए लोगों का कहना था कि सालभर पहले की आपदा से यदि एक भी सबक लिया होता तो लोगों को नुकसान नहीं झेलना पड़ता। एसडीएम ने लोगों को किसी तरह शांत कराया। बताया कि सरकारी मशीनरी अपना काम कर रही है। सुबह से ही नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस कर्मी राहत बचाव कार्य में जुटे हैं। देवीरोड निवासी वैभव कुमार, विनोद कुमार, उपेंद्र मित्तल का कहना है कि देवीरोड पर दाई खोह नहर यदि खुली रहती तो रिफ्यूजी कालोनी और देवीरोड के लोगों को नुकसान नहीं झेलना पड़ता।