कोटद्वार। ग्राम प्रधान संगठन दुगड्डा से जुड़े कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पौड़ी जिला प्रशासन और सरकार पर एक साल से विकास कार्य ठप करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। कहा कि पंचायतों के बजट में पूर्ववर्ती सरकार के समय से ही कटौती शुरू हो गई थी, लेकिन एक साल से भाबर की ग्राम पंचायतों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हुए बजट आवंटन रोक दिया गया है। ग्रामीणों को विकास योजनाओं का लाभ न मिलने से आक्रोश बना है।
सिमलचौड़ पंचायत भवन में सुरेश रावत की अध्यक्षता में हुई प्रधानों की बैठक में सरकार और प्रशासन पर कोटद्वार भाबर की पंचायतों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया। कहा कि जनभावनाओं के विपरीत ग्रामीण क्षेेत्रों को नगर निगम में शामिल करने से जनता में आक्रोश है। नगर निगम के साथ ही सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में जिला विकास प्राधिकरण का अनावश्यक हस्तक्षेप भी बढ़ गया। हाईकोर्ट की ओर से लगातार दूसरी बार अधिसूचना को निरस्त कर ग्रामीण अंचल की जनता को न्याय दिया गया है। जिला प्रशासन ने जहां भाबर के ग्राम पंचायत अधिकारियों का यहां से स्थानांतरण कर दिया है, वहीं विकास योजनाओं के लिए धनावंटन पर भी रोक लगा दी है।
प्रदर्शनकारियों में पदमपुर सुखरो के प्रधान चंद्रप्रकाश नैथानी, मगनपुर के विजय प्रकाश ध्यानी, सुनीता डबराल, महेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह रावत, दिनेश गुसाईं, विमला जोशी, कृष्ण चंद्र, भागीरथी देवी, विनोद सिंह, सुनीता देवी, वीरेंद्र सिंह पाल, संजय कुमार, विजयराम, सुमन रावत, कीरत सिंह नेगी, डबल सिंह रावत आदि शामिल थे।