कोटद्वार। प्रदेश सरकार ने सीमा विस्तार के बाद 73 गांवों को कोटद्वार नगर निगम में शामिल कर दिया है। इससे क्षेत्र के 73 गांवों के ग्रामीणों का भविष्य फिलहाल अधर में लटका है। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने सरकार के इस फैसले के विरोध में कोर्ट से स्टे लिया है। सरकार और कोर्ट के बीच मामला फंसने से ग्रामीण इलाकों में सरकार की कल्याणकारी योजनाएं ठप हो गई हैं।
कोटद्वार नगर निकाय के नए परिसीमन के बाद नगर निगम में शहर से सटी 35 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। इन पंचायतों में 73 गांव हैं। सरकार ने जनवरी के पहले सप्ताह निगम में शामिल ग्राम पंचायतों के प्रधानों के बस्ते जमा करवाने के आदेश जारी कर दिए। सरकारी आदेश के बाद ग्राम पंचायतों में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारियों ने काम करना छोड़ दिया। सीमा विस्तार का ग्रामीणों और ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने पुरजोर ढंग से विरोध किया। ग्राम प्रधान संगठन दुगड्डा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने ग्राम प्रधान संगठन के पक्ष में स्टे देते हुए सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तारीख दी है।
नगर निगम, ग्राम प्रधान और आम जनता की निगाहें अब कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। पदमपुर के ग्राम प्रधान चंद्र प्रकाश नैथानी बताते हैं। फिलहाल 73 गांवों की जनता सरकार और कोर्ट के फैसले के इंतजार में बीच में लटकी है। ग्रामीण इलाकों में जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, राशन कार्ड, प्रमाण पत्र बनाए जाने संबंधित सभी काम बंद पड़े हैं। चंद्रप्रकाश नैथानी बताते हैं कि जिला प्रशासन के आदेश पर ग्राम पंचायत अधिकारियों ने पंचायती कार्य छोड़ दिए हैं। वहीं, नगर निगम के अफसर मामला कोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देकर ग्रामीणों की बात सुनने को तैयार नहीं हैं।